70 फर्जी पासपोर्ट पर पुलिस वेरिफिकेशन सवालों के घेरे में * एसटीएफ खंगाल रही उन पुलिसकर्मियों की भूमिका, जिनकी रिपोर्ट के बाद जारी हुए पासपोर्ट

70 फर्जी पासपोर्ट पर पुलिस वेरिफिकेशन सवालों के घेरे में
* एसटीएफ खंगाल रही उन पुलिसकर्मियों की भूमिका, जिनकी रिपोर्ट के बाद जारी हुए पासपोर्ट
भोपाल, यश भारत। बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट दिलाने वाले गिरोह की जांच अब सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। एसटीएफ की पड़ताल का दायरा उन पुलिसकर्मियों तक पहुंच गया है, जिन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदकों का वेरिफिकेशन किया था। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि फर्जी पते और दस्तावेजों के बावजूद पुलिस सत्यापन में खामियां कैसे रह गईं।
गिरोह के जरिए करीब 70 भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित थाना क्षेत्रों में हुए वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया जांच के घेरे में है। एसटीएफ अब उन पुलिसकर्मियों की जानकारी जुटा रही है, जो इन आवेदनों के सत्यापन के समय संबंधित क्षेत्रों में तैनात थे। जांच का अहम बिंदु यह है कि क्या मौके पर जाकर पते की वास्तविकता जांची गई थी या दस्तावेजों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई।
दो और गिरफ्तारियां, जांच का दायरा बढ़ा
एसटीएफ ने महाराष्ट्र से प्रियान रॉय और जॉय चौधरी को गिरफ्तार किया है। प्रियान रॉय ने वर्ष 2022 में भोपाल के अंबेडकर वार्ड क्षेत्र के फर्जी पते का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट बनवाया था। वहीं जॉय चौधरी ने गुजरात के पते के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया था। गुजरात से जुड़े मामले की जानकारी वहां की पुलिस को भी दी जाएगी।
पूछताछ में गिरोह के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी से मिली जानकारी के आधार पर इन दोनों तक जांच एजेंसी पहुंची। इससे संकेत मिले हैं कि नेटवर्क ने अलग-अलग राज्यों में फर्जी पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पासपोर्ट हासिल करने का रास्ता तैयार किया था।
विदेश यात्राओं की कड़ी भी खंगाली जा रही
एसटीएफ अब यह भी पता लगा रही है कि फर्जी पासपोर्ट हासिल करने वालों ने उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया। जांच में सामने आया है कि कुछ लोग इन पासपोर्ट के जरिए थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका, जापान, कंबोडिया, स्पेन और इंडोनेशिया की यात्राएं कर चुके हैं। एजेंसी यह जांच रही है कि कहीं गिरोह का संबंध फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश में नौकरी दिलाने वाले नेटवर्क से तो नहीं है।
इसके लिए विदेश गए लोगों के संपर्क, यात्रा और दस्तावेजों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोधा के अनुसार फरार आरोपियों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने में मदद करने वाले लोगों की भी तलाश जारी है।
10 टीमें तलाश रही नेटवर्क की जड़
रैकेट की गहराई का पता लगाने के लिए एसटीएफ ने 10 टीमें लगाई हैं। इनमें चार टीमें मध्यप्रदेश में और छह टीमें असम, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में जांच कर रही हैं। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट जारी होने तक किस-किस स्तर पर चूक हुई और इस पूरी प्रक्रिया से कौन-कौन लोग जुड़े रहे।







