सैंड आर्ट से ओडिशा के कलाकार ने उकेरी श्रीराम की अद्भुत कलाकृति
वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में बिखरी भारतीय संस्कृति की छटा

जबलपुर, यशभारत। संस्कारधानी जबलपुर में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में भारतीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिल रही है। 2, 3 एवं 4 जनवरी को मानस भवन में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत सहित अनेक देशों से रामायण प्रेमी, विद्वान, कलाकार और भिक्षु भाग लेने पहुंचे हैं। कॉन्फ्रेंस में श्रीलंका के बौद्ध भिक्षु उडुगामा सारनाथिसा, लाओस के आचरन सिफान डान सहित श्रीलंका, थाईलैंड और मलेशिया के कलाकार एवं साहित्यकारों की सहभागिता से आयोजन और भी भव्य बन गया है।
ओडिशा के कलाकार की सैंड आर्ट बनी आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में पहली बार सैंड आर्ट की अनूठी प्रस्तुति भी देखने को मिली। ओडिशा से आए सैंड आर्टिस्ट गोपाल चरण ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रेत से भगवान श्रीराम की भव्य कलाकृति का निर्माण किया है। यह कलाकृति सम्मेलन में आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
गोपाल चरण ने बताया कि उन्होंने लगभग 8 घंटे की मेहनत से भगवान श्रीराम की यह कलाकृति तैयार की है। सामान्यतः सैंड आर्ट समुद्र तटोंड पर बनाई जाती है, लेकिन जबलपुर में यह कलाकृति मां नर्मदा की रेत से बनाई गई है, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है।
सम्मेलन द्वार पर स्थापित, हर आगंतुक को हो रहे श्रीराम के दर्शन
गोपाल ने बताया कि यह सैंड आर्ट मानस भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर बनाई गई है, ताकि रामायण कॉन्फ्रेंस में आने वाला हर व्यक्ति भगवान श्रीराम के दर्शन कर सके। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें ज्ञात हुआ कि जबलपुर में देश-विदेश के रामायण प्रेमी एकत्र हो रहे हैं, उन्होंने यहां आकर अपनी कला के माध्यम से श्रीराम को समर्पण करने का निर्णय लिया।







