सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा पर सांसद विवेक तन्खा का सवाल, क्या मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए गए हैं
भोपाल। यश भारत।

सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा पर सांसद विवेक तन्खा का सवाल, क्या मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए गए हैं
भोपाल। यश भारत। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की समय पर अनुपस्थिति, आपातकालीन सेवाओं की कमी और सबसे चिंताजनक, चूहों द्वारा मरीजों को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा हैं।
सांसद तन्खा ने उदाहरण देते हुए बताया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दो नवजात शिशुओं को चूहों ने कुतर लिया। वहीं, छतरपुर के जिला अस्पताल की दवाओं की अलमारी में चूहों का जमावड़ा और जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में मरीजों के पैरों को चूहों द्वारा काटे जाने की घटनाएँ साफ तौर पर स्वच्छता की घोर कमी को उजागर करती हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में भर्ती मरीज पहले से ही पीड़ित होते हैं, लेकिन असुरक्षित और अव्यवस्थित माहौल उनकी उम्मीदों को तोड़ देता है। यह दोहरा आघात है—बीमारी का दर्द और असुरक्षा का भय। सांसद तन्खा ने हाल ही में संसद के सत्र में आयुष्मान कार्ड घोटालों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि गरीबों के लिए बने इन कार्डों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है और कुछ अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू भी की गई है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत और कठोर कदम उठाने होंगे, ताकि आम आदमी का भरोसा फिर से लौट सके। अब समय आ गया है कि जनता इस अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करे चाहे वह सोशल मीडिया पर हो, अदालत में या सड़कों पर। सरकार की प्राथमिकताएँ तभी सही दिशा में होंगी जब अस्पताल भय का केंद्र नहीं, बल्कि जीवन रक्षक बनेंगे।







