भोपालमध्य प्रदेश

MP पुलिस में पदोन्नति का अकाल: 2015 बैच के अफसर पहुंचे DGP के द्वार, सिस्टम पर उठे सवाल

MP पुलिस में पदोन्नति का अकाल: 2015 बैच के अफसर पहुंचे DGP के द्वार, सिस्टम पर उठे सवाल

भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति पर लगी अघोषित रोक अब पुलिसकर्मियों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया से आक्रोशित 2015 बैच के उपनिरीक्षकों और सूबेदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर अपना दुखड़ा सुनाया। अफसरों का कहना है कि पात्रता पूरी होने के बावजूद पिछले डेढ़ साल से उनकी पदोन्नति रुकी हुई है, जिससे विभाग के हजारों कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है।
रिक्त पदों के बावजूद नहीं मिल रहा प्रभार
सूत्रों के अनुसार, जिला पुलिस बल में रक्षित निरीक्षक (RI) और इंस्पेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद बड़ी संख्या में खाली पड़े हैं। इसके बावजूद, पात्र अधिकारियों को कार्यवाहक प्रभार देने पर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है। 2015 बैच के अफसरों का तर्क है कि समय पर पदोन्नति न मिलने से न केवल उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

सियासी गलियारों में गरमाया मुद्दा
पुलिस विभाग की इस आंतरिक कलह ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं:
विपक्ष का प्रहार: पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “प्रदेश का सिस्टम पूरी तरह कोलेप्स हो चुका है। न भर्तियां हो रही हैं और न ही पदोन्नति। जब पुलिसकर्मियों का हक ही उन्हें नहीं मिलेगा, तो वे मुस्तैदी से काम कैसे करेंगे? यही कारण है कि कानून व्यवस्था बिगड़ रही है।
सत्ता पक्ष का बचाव: भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेष बाजपेयी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, पदोन्नति और क्रमोन्नति की प्रक्रिया निरंतर चल रही है। मध्य प्रदेश पुलिस का परफॉर्मेंस देश में बेहतरीन है। कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह केवल भ्रम फैला रही है।
पदोन्नति रुकने के मुख्य कारण
राज्य में पदोन्नति में आरक्षण का मामला लंबे समय से कानूनी पेच में फंसा हुआ है। हालांकि, सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए ‘कार्यवाहक प्रभार’ की व्यवस्था शुरू की थी, लेकिन 2015 बैच के लिए यह प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। यदि जल्द ही इस पर निर्णय नहीं लिया गया, तो मैदानी स्तर पर पुलिसिंग और अनुशासन पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

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