स्वास्थ्य हब बनने की ओर अग्रसर मध्य प्रदेश, डॉ. मोहन यादव सरकार का ‘हेल्थ मिशन

स्वास्थ्य हब बनने की ओर अग्रसर मध्य प्रदेश, डॉ. मोहन यादव सरकार का ‘हेल्थ मिशन
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश अब केवल कृषि और पर्यटन ही नहीं, बल्कि देश के बड़े ‘मेडिकल हब’ के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में एक ऐसा ऐतिहासिक कायाकल्प हो रहा है, जिसने पिछले सात दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 2003 तक जहाँ प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा ठहरी हुई थी, वहीं अब 2028 तक हर जिले में बेहतर इलाज और मेडिकल कॉलेज का सपना साकार होता दिख रहा है।
आंकड़ों में क्रांति: 6 से 52 मेडिकल कॉलेजों का सफर
वर्ष 2003 तक मध्य प्रदेश में केवल 5 शासकीय और कुल 6 मेडिकल कॉलेज थे। आज डॉ. मोहन यादव सरकार की सक्रियता का परिणाम है कि प्रदेश में कुल 33 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। सरकार का लक्ष्य इसे वर्ष 2028 तक 52 तक ले जाने का है।
सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि: MBBS सीटें: 2003 की मात्र 1,250 सीटों के मुकाबले आज 5,550 सीटें उपलब्ध हैं।
PG सीटें: उच्च शिक्षा के लिए सीटों की संख्या बढ़कर 2,862 हो गई है, जिससे प्रदेश को विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे।
पीपीपी मॉडल से सुदूर अंचलों तक पहुँचेगी सुविधा
सरकार केवल सरकारी बजट पर निर्भर न रहकर पीपीपी (PPP) मॉडल के जरिए निवेश आकर्षित कर रही है। कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में नए कॉलेजों के लिए एमओयू हो चुके हैं, वहीं 9 अन्य जिलों में निविदा प्रक्रिया जारी है। नीमच, मंदसौर, श्योपुर और सिंगरौली जैसे जिलों में कॉलेजों की शुरुआत ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब चिकित्सा शिक्षा बड़े शहरों की जागीर नहीं रही।
आयुष का पुनरुत्थान: वेलनेस टूरिज्म पर जोर
एलोपैथी के साथ-साथ मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान ‘आयुष’ (Ayurved) पर भी है।
नए संस्थान: 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्वीकृति दी गई है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर: 238 औषधालयों को अपग्रेड कर आधुनिक वेलनेस सेंटर बनाया गया है।
रोजगार सृजन: आयुष विभाग में करीब 3,000 नए पदों का सृजन कर युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र से जोड़ा जा रहा है।
डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात में भारी सुधार
इस विस्तार का सबसे सुखद परिणाम सामाजिक मानकों पर दिख रहा है। वर्ष 2003 में प्रति 10 लाख की आबादी पर केवल 20 डॉक्टर (MBBS सीट उपलब्धता) तैयार होते थे, जो अब बढ़कर 63 हो चुके हैं। 2028 तक मध्य प्रदेश इस मामले में राष्ट्रीय औसत के बराबर पहुँच जाएगा।
भविष्य की राह: डिजिटल और एडवांस्ड केयर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के अनुसार, आने वाले 3 वर्षों में ‘E-Hospital’ और ‘E-औषधि’ प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे मरीजों को दवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही, जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया जैसे रोगों के उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
हमारा लक्ष्य केवल बिल्डिंग बनाना नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के हर नागरिक को उसके घर के पास सस्ता और आधुनिक इलाज मुहैया कराना है। चिकित्सा शिक्षा का यह विस्तार अंत्योदय के संकल्प की सिद्धि है। – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश







