कृष्ण की मुरली ने बांधा भक्तिरस, होली लीला ने बिखेरे ब्रज के रंग

कृष्ण की मुरली ने बांधा भक्तिरस, होली लीला ने बिखेरे ब्रज के रंग
– रासलीला समारोह के छठवें दिन ब्रज के कलाकारों ने दी मनोहारी प्रस्तुतियां
भोपाल, यश भारत। रविंद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित सात दिवसीय रासलीला समारोह के छठवें दिन मुरली की पुकार और होली लीला प्रसंगों ने दर्शकों को ब्रज की भक्ति और संस्कृति से रूबरू कराया। मथुरा के माधव आचार्य के निर्देशन में ब्रज के पारंपरिक कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।
मुरली की पुकार प्रसंग में श्रीकृष्ण की बांसुरी को जीव और परमात्मा के बीच प्रेम और आकर्षण का प्रतीक बताया गया। कलाकारों ने कृष्ण की मुरली की धुन पर गोपियों के भाव-विभोर होने का मनोहारी मंचन किया।
इसके बाद कृष्ण और गोपियों की होली लीला प्रस्तुत की गई। गीत, नृत्य, हास-परिहास और रंगों के माध्यम से ब्रज की होली के उल्लास और प्रेम को जीवंत किया गया।
प्रकाश माली के भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल
राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक प्रकाश माली और उनके साथियों ने भक्ति गायन की प्रस्तुति दी। गणपति वंदना से शुरू हुए कार्यक्रम में राम सिया राम, राम आएंगे, नटखट बंशी वाले गोकुल के राजा और मीठे रस से भरियोड़ी राधा रानी लागे सहित कई भजनों ने दर्शकों को भक्तिरस में डुबो दिया। समारोह के अंतिम दिन शुक्रवार को नंद उत्सव और महारास का मंचन होगा। इसके बाद नई दिल्ली की तृप्ति शाक्य और साथी भक्ति गायन प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम शाम 6.30 बजे से शुरू होगा। प्रवेश निश्शुल्क रहेगा।







