कल्किधाम संपूर्ण सनातन धर्म की सफलता: शंकराचार्य सदानंद महाराज
हर्षोल्लास से मनाया गया शिला स्थापना दिवस

संभाल के विकासखंड असमोली के गांव ऐंचौड़ा कंबोह स्थित श्री कल्कि धाम में बुधवार को एक ऐतिहासिक नवसर पर शिला स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम में जब जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूजित कर्म शिला को गर्भगृह में विधिपूर्वक स्थापित किया तो उज्जैन महाकालेश्वर से आए पुरोहितों के मंत्रोचार से पूरा परिसर गूंजायमान हो उठा। इसके बाद एक-एक कर आए अतिथियों ने शिला पूजन कर उनकी स्थापना की।
प्रधानमंत्री मोदी की पूजा की हुई शिला को मिला गर्भगृह में स्थान आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने बताया कि 2 नवंबर 2007 को जब मुझे श्री कल्कि पीठाधीश्वर बनाया गया था तभी मैंने यह संकल्प लिया था कि भगवान के प्राकट्य से पहले उनका धाम बने। यह यात्रा संघषों से भरी रही, लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी स्वयं यहां भूमि पूजन व शिला पूजन के लिए आए, तो यह स्पष्ट हो गया कि अब कोई शक्ति इस धाम को बनने से रोक नहीं सकती। उन्होंने कहा कि 21 फीट गहराई में गर्भगृह में शिला की स्थापना आज सनातन के उत्थान की घोषणा है। विश्व हिंदू परिषद और संत समाज का समर्थन विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह शुभ दिन लंबे संघर्ष के बाद आया है। कट्टरपंथी और सत्ता दोनों का विरोध सहा लेकिन अब बाधाएं समाप्त हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शिला को पूजना और शंकराचार्य भगवान द्वारा शिलाओं को स्थापित करना इस बात की घोषणा करता है कि अब कोई भी बाधा इस धाम को बनने से नहीं रोक सकती जय समय में यहां विशालतम मंदिर का निर्माण होकर रहेगा। नरेंद्र मोदी जी द्वारा कही बात अक्षरश: सल्य हो रही है कि श्री कल्कि धाम विश्व की दिशा देगा। आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महाममंडलेश्र स्वामी बालकजी महाराज ने कहा कि कल्कीधाम का निर्माण भगवान के अवतरण की पूर्व सूचना है। प्रधानमंत्री द्वारा शिला पूजन और शंकराचार्य द्वारा स्थापना यह देश और विश्व को दिशा देने वाला कार्य है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने यहां आकर शिलाओं का पूजन किया यह देश को संकेत देता है जहां पर स्वयं भारत राष्ट्र का सेवक शिला पूजन करके जाए। उस स्थान की महत्ता समाज की पूरे विश्व को एक ऐसा संदेश देगी जिस प्रकार हमारा दे जगद्गुरु था और जगद्गुरु को स्थापित करने में कल्कि धाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस कल्कि धाम को बनाने में जो भी सहयोग हम सभी के लिए आदेशित होगा उसका हम तन, मन, धन से अनुपालन करेंगे। रोमानिया की एंका हुईं अभिभूत रोमानिया निवासी एंका, जो शिला स्थापना महोत्सव में विशेष रूप से शामिल होने पहुँचर्ची। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और दर्शन से मैं अत्यंत प्रभावित हूँ। य आकर मुझे यह अनुभव हुआ कि यह धाम दिव्यता का केंद्र है। मैं भविष्य में भी यहाँ आना चाहूंगी। कार्यक्रम में यह रहे मौजूद कार्यक्रम में रामपुर विधायक आकाश सक्सेना, हरिद्वार विधायक उमेश कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व मंत्री सुनील बराला, शिवसेना राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अभिषेक वर्मा, नक्षत्रेश कुमार आर्य ऊषा रमन त्रिपाठी, मणींद्र जैन सहित अनेक संत समाजसेवी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने किया शिलान्यास और राज्यपाल ने भू उत्खनन श्री कल्किधाम का शिलान्यास 19 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। जिसके बाद से कल्किधाम की भव्यता पूरे देश में फैल गई थी। जिसके बाद से लगातार शिलादान के कार्यक्रम साल भर चलते रहे।
ऐसा होगा श्री कल्किधाम
कल्कि धाम मंदिर में जगत के पालनहार भगवान श्री हरि के 10 अवतारों के लिए अलग-अलग 10 गर्भगृह बनाए जाएंगे। इस पवित्र धाम में 68 धार्मिक तीर्थों की स्थापना होगी। 5 एकड़ में बनने जा रहा यह अद्भुत धाम लगभग 5 सालों में तैयार होगा। मंदिर का निर्माण गुलाबी रंग के पत्थरों से किया जाएगा और यह दुनिया का अद्भुत व अनोखा मंदिर होगा। मंदिर के शिखर की ऊंचाई 108 फीट और 11 फीट के ऊपर मंदिर का चबुतरा बनेगा।
आचार्य प्रमोद कृष्णम के 18 वर्षों के कठोर तप, संघर्ष और संकल्प का यह परिणाम
इस दौरान शंकराचार्य सरस्वती जी ने कहा कि आचार्य प्रमोद कृष्णम के 18 वर्षों के कठोर तप, संघर्ष और संकल्प का यह परिणाम है। लेकिन यह केवल उनका व्यक्तिगत विजय नहीं, सम्पूर्ण सनातन धर्म का गौरव है। यह धाम सनातन संस्कृति को नई ऊंचाई देगा। यहाँ भगवान विष्णु के दसों अवतारों के लिए दस गर्भगृह बनाए जाएंगे। शास्त्र सम्मत आचरण प्रत्येक मनुष्य की जिम्मेदारी है। जैसे बिना टिकट यात्रा करने पर दोष रेलवे का नहीं होता, वैसे ही धार्मिक जीवन में शास्त्रों की अवहेलना का दोष भी धर्म का नहीं, व्यक्ति का होता है। शंकराचार्य ने कहा कि भगवान श्री कल्कि का अवतार संभल में ही होगा यह बात पुराणों में लिखित है, और श्री कल्कि धाम का यह निर्माण उस अवतरण का संकेत है।







