जबलपुर हाईकोर्ट में 27% ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई शुरू, 3 दिन में तय हो सकती है दिशा
सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर हुए थे केस

जबलपुर,यशभारत। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर बहुप्रतीक्षित सुनवाई एक बार फिर तेज हो गई है। जबलपुर हाईकोर्ट में 27% ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले पर तीन दिवसीय सुनवाई (27–29 अप्रैल) शुरू हो चुकी है, जिसे राज्य की राजनीति और लाखों युवाओं के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
विशेष बेंच में सुनवाई
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजय सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की विशेष बेंच कर रही है। मंगलवार सुबह 11 बजे से शुरू हुई कार्यवाही में कुल 86 याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही है।
पहले विरोध, फिर समर्थन पक्ष
सुनवाई के दौरान सबसे पहले ओबीसी आरक्षण का विरोध करने वाले पक्ष की दलीलें सुनी जाएंगी। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, अंशुमान सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अमन लेखी अपनी बात रख रहे हैं।
इसके बाद राज्य सरकार और आरक्षण समर्थक याचिकाकर्ताओं को सुना जाएगा। सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और एएसजी के.एम. नटराजन पक्ष रखेंगे, जबकि समर्थन पक्ष से वरुण ठाकुर और शशांक रतनू दलील देंगे।
सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर हुए थे केस
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को इस मामले से जुड़ी 86 याचिकाओं को हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया था, जिसके बाद अब लगातार सुनवाई हो रही है।
2019 से चल रहा विवाद
यह मामला वर्ष 2019 से लंबित है, जब कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% कर दिया था। इस फैसले के बाद कुल आरक्षण 50% की सीमा पार कर लगभग 63% तक पहुंच गया, जिसे सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित सीमा के खिलाफ माना गया।
क्या है दांव पर?
इस केस का असर सीधे तौर पर सरकारी भर्तियों और लाखों उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ता है। तीन दिन की इस लगातार सुनवाई के बाद अदालत इस मामले में अहम दिशा तय कर सकती है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।







