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12 साल के नन्हे क्रिकेटरों का दमदार प्रदर्शन, मध्य प्रदेश से लेकर टीम इंडिया तक का सपना वी.एस. अकादमी में चिल्ड्रन गेम्स के दौरान दिख रही प्रतिभा

12 साल के नन्हे क्रिकेटरों का दमदार प्रदर्शन, मध्य प्रदेश से लेकर टीम इंडिया तक का सपना

वी.एस. अकादमी में चिल्ड्रन गेम्स के दौरान दिख रही प्रतिभा

भोपाल यश भारत। राजधानी भोपाल के गौतम नगर स्थित वी.एस. अकादमी में चल रहे चिल्ड्रन गेम्स में 12 साल की उम्र के नन्हे क्रिकेटरों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। क्रिकेट के प्रति इन बच्चों की रुचि  लगन और कड़ी मेहनत मैदान पर साफ नजर आ रही है। कोच की ट्रेनिंग और लगातार अभ्यास के बीच ये खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखारने में जुटे हुए हैं।

इन बच्चों के लिए क्रिकेट महज एक खेल नहीं  बल्कि भविष्य का सपना है। कई खिलाड़ी मध्य प्रदेश की टीम और आगे चलकर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का लक्ष्य लेकर मैदान पर पसीना बहा रहे हैं। कम उम्र में ही इन खिलाड़ियों में क्रिकेट के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है।

 

कोच ने बताया कि खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग की ओर से खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं से बच्चों को काफी मदद मिल रही है। उन्होंने इसके लिए आभार भी जताया। कोच और खिलाड़ियों का कहना है कि क्रिकेट जैसे खेल में प्रतिभा के साथ साथ पर्याप्त संसाधनों की भी जरूरत होती है। इक्विपमेंट  बेहतर ग्राउंड  लाइट की व्यवस्था खान पान और नियमित ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं खिलाड़ियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मध्य प्रदेश के अलग अलग जिलों से आने वाले कई बच्चे अपनी प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की भी है  जो मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। ऐसे परिवारों के लिए लंबे समय तक क्रिकेट की ट्रेनिंग और उससे जुड़े खर्च को वहन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद बच्चों की मेहनत और क्रिकेट के प्रति जुनून उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। कोच का मानना है कि यदि इन खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण  सुविधाएं और लगातार अभ्यास का अवसर मिलता रहा  तो आने वाले समय में इनमें से कई बच्चे मध्य प्रदेश और देश के लिए बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कोच ने अपने क्रिकेट करियर को याद करते हुए कहा कि उनकी भी क्रिकेट में काफी रुचि थी  लेकिन अब इन बच्चों को तैयार करने में उन्हें अपने अधूरे क्रिकेट सपने को एक अलग रूप में जीने का अनुभव मिलता है। उनका कहना है कि इन बच्चों की मेहनत और सफलता ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी होगी। 12 साल की उम्र में क्रिकेट के प्रति इन खिलाड़ियों का जुनून और अपने सपनों को पूरा करने की लगन यह उम्मीद जगाती है कि सही मार्गदर्शन और सुविधाएं मिलने पर ये नन्हे खिलाड़ी आने वाले वर्षों में बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

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