भोपाल

शिकारी कुत्ते संभालेंगे बाघ की सुरक्षा की कमान – शिकारियों को दबोचने के लिए करेंगे जांच दल की मदद

शिकारी कुत्ते संभालेंगे बाघ की सुरक्षा की कमान
– शिकारियों को दबोचने के लिए करेंगे जांच दल की मदद
भोपाल यशभारत। मप्र के जंगलों में विचरण कर रहे बाघों की सुरक्षा की कमान अब कुत्तों के हाथ में होगी। मप्र के तीन वन अभ्यारण्य में स्निफर डॉग तैनात करने की तैयारी की गई है। डॉग स्क्वाड ना सिर्फ शिकारी गतिविधियों पर नजर रखेंगे बल्कि जांच में भी मदद करेंगे। शिकारियों की नजर में रहने वाले राष्ट्रीय उद्यानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। मध्यप्रदेश के पेंच, कूनो, और संजय-डुबरी नेशनल पार्क में स्निफर डॉग तैनात करने का निर्णय लिया गया है। ये तीनों पार्क मप्र के सीमावर्ती जिलों में हैं।
इसलिए तैनात किए जा रहे हैं स्निफर डॉग की
स्निफर डॉग ऐसे प्रशिक्षित कुत्ते होते हैं जो अपनी तीव्र सूंघने की क्षमता का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की गंधों, जैसे अवैध ड्रग्स, विस्फोटक, मानव रक्त, या संक्रमण का पता लगाते हैं। इन्हें कानून प्रवर्तन एजेंसियों, हवाई अड्डों, और आपदा प्रबंधन में उपयोग किया जाता है। वे विस्फोटक, नशीली दवाओं और अन्य प्रतिबंधित पदार्थों की गंध सूंघकर उनका पता लगाते हैं।
इस तरह का दिया जा रहा प्रशिक्षण
जंगल में शिकार के मामले सामने आने के बाद शिकारी को ढूंढने में वन अमले की मदद करेंगे। खास बात यह है कि शिकारी तक पहुंचने के लिए साक्ष्य भी एकत्र करेंगे। प्रशिक्षित डॉग मानव अवशेषों को ढूंढने के लिए प्रशिक्षित किए जा रहा है खास कर आपदा के समय भी ये उपयोग में आते हैं। ये अपराधियों के पसीने या शरीर की गंध का पता लगाकर संदिग्धों को पकडऩे में जांच दल की मदद करेंंगे।
सेना व पुलिस करती है स्निफर डॉग का उपयोग
स्निफर डॉग का उपयोग
इन कुत्तों को विशेष रूप से गंधों को पहचानने और उनका संकेत देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। पुलिस, सेना, और अन्य एजेंसियों द्वारा विभिन्न उद्देश्यों के लिए इनका उपयोग किया जाता है, जिससे अपराधों को सुलझाने और खतरों को रोकने में मदद मिलती है।
श्योपुर का कूनो राजस्थान सीमा, सिवनी-छिंदवाड़ा का पेंच महाराष्ट्र सीमा और सीधी का संजय-डुबरी यूपी-छत्तीसगढ़ सीमा से सटा है। पंचकूला स्थित आईटीबीपी ट्रेनिंग सेंटर में इन स्निफर डॉग को प्रशिक्षित किया जा रहा जा रहा है। सूंघने की शक्ति से वे शिकारियों का पता लगा सकेंगे। शिकारियों की टोह लेने के साथ ही उन्हें पकडऩे में भी मदद करेंगे।
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मप्र में लगातार सामने आ रहे बाघ के शिकार का मामले
मप्र में वन्यप्राणियों को बेहतर संरक्षण देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में वन अमले को सुरक्षा के तैनात किया है। शिकारियों को रोकने के लिए जगह जगह कैमरे भी लगाए गए हैं, बावजूद इसके वन्यप्राणियों के शिकार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। नर्मदापुरम जिले में दो बाघ के शिकार का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर वन विभाग का दावा है कि लगातार गश्त की जा रही है और शिकारियों पर नजर रखी जा रही है ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इतनी चौकसी के बाद भी शिकारी शिकार कैसे कर रहे हैं। सोहागपुर और तवा के किनारे बाघ के शव मिले हैं। शिकारियों ने शिकार करने के बाद उनके पंजे काटकर ले गए हैं। एक ही सप्ताह में बाघ के शिकार के दो मामले सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्रचिन्ह लग गया है।

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