हाई-प्रोफाइल जुआ फड़…राजनैतिक रसूख, छोडऩा पड़ा खिलाडिय़ों को…. यश भारत विशेष की रिपोर्ट

जबलपुर, यशभारत विशेष रिपोर्ट – जिले के पाटन थाना क्षेत्र में बीती रात एक बड़े हाई-प्रोफाइल जुआ फड़ का खुलासा हुआ, जिसने न केवल पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े किए, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली राजनीतिक हस्तक्षेप की झलक भी सामने रख दी। होटल किंग्सवे मैरिज गार्डन में संचालित हो रहे इस गुप्त जुआ अड्डे पर जबलपुर से आई स्पेशल टीम और पाटन पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 1 लाख 67 हजार 900 रुपये नकद, तीन लग्जरी कारें और एक बुलेट मोटरसाइकिल जब्त की।
थाने को नहीं थी भनक, विशेष टीम ने किया खुलासा
हैरानी की बात यह रही कि पाटन थाना क्षेत्र में संचालित हो रहे इस जुआ अड्डे की भनक तक स्थानीय पुलिस को नहीं थी। जबलपुर से स्पेशल इनपुट पर कार्रवाई करते हुए विशेष टीम मौके पर पहुंची और पाटन थाना स्टाफ को साथ लेकर होटल किंग्सवे में दबिश दी। पुलिस के पहुंचते ही मौके पर मौजूद जुआरियों में भगदड़ मच गई, कई ने भागने की कोशिश की, लेकिन कुछ को रंगे हाथ पकड़ा गया।
अन्य जिलों से आते थे जुआरी
जांच में सामने आया कि यह फड़ केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं था, बल्कि भोपाल, कटनी, नरसिंहपुर, दमोह और सागर जैसे जिलों से भी जुआरी यहां पहुंचते थे। प्रत्येक रात होटल में जुए की महफिल सजती थी, जिससे आयोजकों को प्रतिदिन लाखों का लाभ होता था।
चार वाहन भी पुलिस के कब्जे में
पाटन एसडीओपी लोकेश डाबर ने जानकारी देते हुए बताया कि मौके से तीन महंगी कारें और एक बुलेट मोटरसाइकिल जब्त की गई है, जिनका इस्तेमाल जुआरियों द्वारा किया जा रहा था। सभी वाहनों को थाने में खड़ा कराया गया है।
थाना पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में
स्थानीय थाना पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। वर्षों से एक ही स्थान पर संचालित हो रहे जुआ फड़ की भनक तक थाने को नहीं लगना, या तो घोर लापरवाही है या सुनियोजित मिलीभगत।सवाल यह भी है कि जब आसपास के लोग इस फड़ की जानकारी रखते थे, तो पाटन पुलिस क्यों अनजान बनी रही?
राजनीतिक हस्तक्षेप की खुली कहानी: भोपाल से कॉल और नामचीनों की रिहाई
कार्रवाई के दौरान जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही, वह यह कि कुछ नामचीन जुआरियों को कथित रूप से भोपाल से आए राजनीतिक कॉल के चलते मौके से ‘सामान्य पूछताछÓ के बाद छोड़ दिया गया। यह सूचना अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कुछ प्रभावशाली चेहरों को साजिशन बचाया गया?स्थानीय सूत्रों की मानें तो कुछ जुआरी राजनीति, व्यवसाय और रसूखदार वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई अधूरी रही। यदि ऐसा है तो यह कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है।
हाईटेक अंदाज में चल रहा था ‘बेगम-बादशाह का खेल
सूत्रों के अनुसार, होटल के एक निजी हॉल को जुआ फड़ के रूप में परिवर्तित कर अत्याधुनिक अंदाज में ‘बेगम-बादशाह, ‘तीन पत्ती और अन्य ताश के खेल खेले जा रहे थे। लग्जरी माहौल, कूलिंग सिस्टम और ष्टष्टञ्जङ्क से रहित क्षेत्र में यह सारा खेल चलता था। मौके पर फड़ से ?1.67 लाख से अधिक की नकदी बरामद की गई।
जनता की मांग: हो निष्पक्ष जांच, हो नाम सार्वजनिक
अब स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जनता चाहती है कि जिन चेहरों को छोड़ा गया, उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं और समान रूप से सभी पर कार्रवाई हो।पाटन का यह मामला केवल एक जुआ फड़ की छापामार कार्रवाई नहीं है, यह पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता, राजनीतिक हस्तक्षेप और आपराधिक संगठनों की गहराई तक फैली जड़ों का प्रतीक है। यदि इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह नजीर आने वाले समय में अपराधियों को और अधिक निर्भीक बना सकती है।







