जबलपुरमध्य प्रदेश

“या हुसैन” की सदाओं के बीच छलका गम, कर्बला के शहीदों की याद में निकला मातमी जुलूस

इंसाफ और इंसानियत के मार्ग पर चलने का दिया संदेश

जबलपुर, यशभारत। मोहर्रम की 10वीं तारीख यौमे आशूरा पर शुक्रवार को शहर गम और अकीदत के रंग में रंगा नजर आया। शिया समुदाय ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला। “या हुसैन… या हुसैन” की सदाओं, नौहाख्वानी और सीना-ज़नी के बीच माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उनके बताए सत्य, इंसाफ और इंसानियत के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

सुबह फूटाताल स्थित जाकिर अली मस्जिद में आमाले आशूरा अदा किए गए, जहां बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने नम आंखों से इबादत कर कर्बला के शहीदों को याद किया। इसके बाद गलगला स्थित इमामबाड़ा से मातमी जुलूस रवाना हुआ। जुलूस में शामिल लोग नौहे पढ़ते हुए और सीना-ज़नी करते हुए आगे बढ़े। पूरे मार्ग में “या अली”, “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं, जिससे वातावरण भावुक हो उठा। सिटी कोतवाली के सामने शिया मुस्लिमों ने पारंपरिक मातम किया।

इसके बाद जुलूस बड़ा फुहारा, बल्देव बाग सहित विभिन्न मार्गों से होता हुआ रानीताल स्थित कर्बला मैदान पहुंचा। यहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार रस्में अदा की गईं और मातमी जुलूस का समापन हुआ। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।

यौमे आशूरा का दिन इस्लामी इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन कर्बला की धरती पर हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों के साथ सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी यही कुर्बानी आज भी अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और इंसानियत की रक्षा का संदेश देती है। इसी संदेश को आत्मसात करते हुए शिया समुदाय ने गम और सम्मान के साथ मातमी जुलूस निकालकर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

आज निकलेगा यौमे आशूरा पर सामूहिक जुलूस

मोहर्रम की 10वीं तारीख यानी यौमे आशूरा पर आज शहर में पारंपरिक सामूहिक जुलूस निकाला जाएगा। दोपहर 2.30 बजे नमाज के बाद विभिन्न क्षेत्रों से ताजियों और सवारियों के जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए रानीताल स्थित कर्बला मैदान पहुंचेंगे। यहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों और सवारियों को ठंडा (विसर्जित) किया जाएगा।

जुलूस में मुफ्ती-ए-आजम मौलाना मुशाहिद रजा कादरी भी लंगर-ए-इमाम में शामिल होंगे। बहोराबाग, चार खंबा, मछली मार्केट, मिलौनीगंज, कोतवाली, कमानिया, फुहारा, बल्देव बाग और आगा चौक सहित विभिन्न मार्गों से जुलूस गुजरते हुए कर्बला मैदान पहुंचेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में लंगर वितरित करने वाले वाहन भी जुलूस का हिस्सा बनेंगे। प्रशासन ने शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।

सदर और गढा में 4 बजे से जुलूस

छावनी क्षेत्र सदर के सवारी ताजियों का जुलूस शाम 4 बजे निकाला जाएगा। जो सदर बाजार की गलियों में गश्त उपरांत रानीताल कर्बला पहुंचेगा। जहां सवारी ताजिये ठंडे किए जाएंगे। उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा में सवारी ताजियों का जुलूस 4 बजे निकलेगा। आनंद कुंज, गढ़ा बाजार, त्रिपुरी चौक से होते हुए सूपाताल कर्बला आएगा, जहां सवारी ताजिये ठंडे किए जाएंगे।

कत्ल की रात पर सवारियों ने की गश्त

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मोहर्रम की नौवीं तारीख पर गुरुवार रात शहर में अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। रोशनी से सजी सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग उमड़े। शहर के विभिन्न इलाकों में स्थापित ताजिये और सवारियां परंपरानुसार गश्त के लिए निकलीं। देर रात सवारियां मदार छल्ला पहुंचीं, जबकि सिटी कोतवाली के सामने भी ताजियों के दीदार के लिए लोगों की भीड़ जुटी। पूरी रात “या अली, या हुसैन” के नारों से वातावरण गूंजता रहा।

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