21 साल बाद प्रदेश में फिर लौटी सरकारी बस सेवा

21 साल बाद प्रदेश में फिर लौटी सरकारी बस सेवा
– सात शहरों से 351 बसों का संचालन शुरू, 2031 तक 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य

यश भारत, भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद आम लोगों के लिए सरकारी बस सेवा फिर शुरू हो गई। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ शुक्रवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बसों को हरी झंडी दिखाकर किया। पहले चरण में प्रदेश के सात शहरों से 351 बसें संचालित की जा रही हैं।
राज्य में पहले परिवहन निगम के माध्यम से सरकारी बसों का संचालन होता था, लेकिन वर्ष 2005 में यह व्यवस्था बंद कर दी गई थी। अब सार्वजनिक परिवहन को नए स्वरूप में शुरू किया गया है। योजना के तहत शहरों के बीच चलने वाली बसों को अंतरनगरीय और शहरों के भीतर संचालित बसों को अंतर्नगरीय सेवा के रूप में संचालित किया जाएगा।

सात शहरों से शुरुआत
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को शामिल किया गया है। इनमें इंदौर में सबसे अधिक 145 बसें चलेंगी। इनमें 50 अंतरनगरीय और 95 अंतर्नगरीय बसें शामिल हैं। भोपाल में 106 बसें, जबलपुर में 67, रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में तीन और भिंड में दो अंतरनगरीय बसों का संचालन होगा।
पहले साल 1500 बसें चलाने की तैयारी
सरकार ने पहले वर्ष में करीब 1,500 बसों को सेवा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद हर साल 2,500 से 3,000 बसें बढ़ाने की योजना है। वर्ष 2031 तक प्रदेश में करीब 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को भी सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।
निजी ऑपरेटरों की होगी भागीदारी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। निजी बस संचालकों को सेवा से जोड़ने के लिए अनुबंध और प्रोत्साहन की व्यवस्था की जाएगी। बस संचालकों के लिए किराये के अलावा विज्ञापन और माल परिवहन जैसी गतिविधियों से अतिरिक्त आय के अवसर भी उपलब्ध कराने की योजना है।
सुरक्षा के साथ तकनीक पर जोर
नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और आपातकालीन बटन लगाए जाएंगे। वाहनों की स्थिति और लोकेशन पर नजर रखने के लिए वाहन लोकेशन ट्रैकिंग प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। इंटेलिजेंट परिवहन प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से बसों की आवाजाही, समयबद्धता और संचालन की वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी। यात्रियों को बसों और उनके मार्ग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए यात्री सूचना प्रणाली भी विकसित की जाएगी। चालकों को सुरक्षित यातायात और आधुनिक तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी।
गांवों तक पहुंचाने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य नई बस सेवा के माध्यम से शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। चरणबद्ध तरीके से अधिक गांवों को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों के संचालन और 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक सेवा विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।







