प्रयागराज पुलिस के एनकाउंटर का डर, नागपुर की पेशी, जबलपुर में फरारी — इसी बीच वीरेंद्र यादव ने रचा था पनागर लूट का मास्टर प्लान!

जबलपुर। पनागर लूट कांड अब केवल एक जिले की वारदात नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क की ओर साफ इशारा कर रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि लूट का मास्टरमाइंड वीरेंद्र यादव प्रयागराज पुलिस के संभावित एनकाउंटर के डर, नागपुर में चल रही पेशियों और जबलपुर में फरारी काटते वक्त ही पनागर लूट की साजिश रच चुका था। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र में भी इसी गिरोह द्वारा लूट की वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है।
एनकाउंटर का खौफ, इसलिए छोड़ा प्रयागराज
सूत्रों के मुताबिक वीरेंद्र यादव के खिलाफ प्रयागराज में गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। वहां पुलिस की सख्ती और एनकाउंटर की आशंका के चलते वह भूमिगत हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने राज्य बदलकर फरारी का रास्ता चुना और मध्यप्रदेश के जबलपुर व महाराष्ट्र के नागपुर अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया।
नागपुर की पेशी बनी ढाल, जबलपुर में रची गई साजिश
वीरेंद्र यादव नागपुर में पेशी के नाम पर अपनी मूवमेंट बनाए रखता था, ताकि वह कोर्ट प्रक्रिया में शामिल दिखे और शक से बचा रहे। लेकिन हकीकत में जबलपुर में फरारी काटते हुए ही पनागर लूट की पूरी पटकथा लिखी जा रही थी। इसी दौरान उसने अपने पुराने और नए साथियों को सक्रिय किया।
महाराष्ट्र में भी वारदात, फिर पनागर बना अगला टारगेट
जांच में यह भी सामने आया है कि पनागर लूट से पहले वीरेंद्र यादव और उसके गिरोह ने महाराष्ट्र में भी लूट की घटनाओं को अंजाम दिया था। वहां से मिले अनुभव और पैटर्न के आधार पर ही पनागर में वारदात की प्लानिंग की गई। पुलिस अब महाराष्ट्र पुलिस से भी आपराधिक रिकॉर्ड और लिंक खंगाल रही है।
किसने दी पनाह? किन घरों में रुका था मास्टरमाइंड
फरारी के दौरान वीरेंद्र यादव पनागर और आसपास के इलाकों में कुछ चुनिंदा लोगों के घरों में रुका। वहीं बैठकर रेकी, बैठकें और रणनीति तय की गई। अब पुलिस उन लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है, जिन्होंने जानबूझकर अपराधी को शरण और सहयोग दिया।
100 नंबर की सक्रियता से पहला प्लान फेल
लूट से कुछ दिन पहले गिरोह एक बार मौके तक पहुंच चुका था, लेकिन संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर 100 नंबर डायल पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस की मौजूदगी से उस दिन लूट टल गई और गिरोह को पीछे हटना पड़ा। इसके बाद और ज्यादा सतर्कता के साथ अंतिम प्लान बनाया गया।
पहले से तय था निशाना — रोज जेवर और नकदी लेकर चलने वाले सुनार
यह लूट पूरी तरह प्री-प्लान्ड थी।
जो सुनार रोजाना जेवरात और नकदी लेकर आवाजाही करते थे, वही पहले से तय टारगेट थे। समय, रास्ते और दिनचर्या की बारीकी से रेकी की गई, फिर वारदात को अंजाम दिया गया।
अब पुलिस के रडार पर पूरा अंतरराज्यीय नेटवर्क
पनागर पुलिस अब सिर्फ मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, प्रयागराज और नागपुर से जुड़े लिंक, पनाह देने वाले लोग और फाइनेंशियल सपोर्ट देने वालों की भी जांच चल रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े कई और नाम उजागर हो सकते हैं।
बड़ा सवाल
जब प्रयागराज में एनकाउंटर का डर,
नागपुर की पेशियों की आड़,
महाराष्ट्र में लूट,
और जबलपुर में फरारी के दौरान पनागर की साजिश,
तो सवाल साफ है—
क्या वीरेंद्र यादव सिर्फ एक आरोपी है, या एक बड़े अंतरराज्यीय लूट नेटवर्क का सरगना?
पनागर लूट कांड अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले अपराध तंत्र की परतें खोलने वाला मामला बन चुका है।








