जबलपुर।मदन महल से गोपालबाग तक फ्लाईओवर निर्माण का ठेका हुआ था। बाद में केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त लंबाई बढ़ाने की मंजूरी दी गई। करीब ७८ करोड़ रुपये इसके लिए स्वीकृत हुए। फ्लाईओवर निर्माण करने वाले एजेंसी एनसीसी को ही यह कार्य देने की पेशकश की गई, लेकिन कंपनी ने कदम पीछे खींच लिए। मजबूरी में लोक निर्माण विभाग की तरफ से नई निविदा जारी करने के लिए शासन के पास प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया। अब इसकी मंजूरी मिली है। परंतु निर्माण कार्य आरंभ होते ही विस्तारीकरण के इस कार्य में भिन्न भिन्न प्रकार की त्रुटियां सामने आने लगी है। जिसमें सर्वप्रथम सर्विस रोड ना बनाने की बात सामने आ रही है। वहीं पाइल लोड टेस्टिंग को भी लेकर अभी भी कुछ प्रश्न उठ रहे हैं जो फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के दौरान भी सामने आए थे।

भोपाल की प्राइवेट लैब ही करेगी सैंपलों की टेस्टिंग!;
फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के प्रारंभिक दौर में जबलपुर की किसी भी लैब को सैंपल टेस्टिंग का ठेका नहीं दिया गया था। इसलिए इन सभी सैंपलों की टेस्टिंग भोपाल की हाईटेक लैब से करवाई जा रही थी परंतु देखने में आया था कि इन सैंपल टेस्टिंग का कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। अधिकारियों द्वारा स्वयं टेस्टिंग के वक्त अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई जा रही थी क्योंकि आधा विभाग कोरोना के डर से घरों में बैठा हुआ था । जिसके कारण कंपनी भी अपने मनमाने ढंग से सैंपलिंग करते हुए कॉलम खड़ी कर दी थी। नाही अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की सामने से कोई भी विटनिस टेस्टिंग करवाई जा रही थी और ना ही किसी भी प्रकार की थर्ड पार्टी टेस्टिंग की जा रही थी। नियमानुसार एनएबीएल की २० परसेंट टेस्टिंग सामने होनी चाहिए वहीं अस्सी परसेंट टेस्टिंग डिपार्टमेंट की लैब में होनी चाहिए। परंतु डिपार्टमेंट को भी लंब बंद पड़ी हुई है क्योंकि डिपार्टमेंट में सरिया की मशीन भी नहीं है। इसी कारण लोहे की टेस्टिंग के लिए कंपनी को बार- बार भोपाल जाना पड़ रहा था, जिसके चलते यह प्रश्न बार बार उठ रहा था कि लोहे की भी टेस्टिंग कितनी ऑथेंटिक हो रही है क्योंकि हर चार गाड़ी के बाद रेत, सीमेंट, गिट्टी की टेस्टिंग जरूरी है और इन सब की टेस्टिंग भोपाल से हो रही थी वहीं विभागीय जानकार कह रहे हैं कि बार-बार टेस्टिंग के लिए भोपाल जाना और इन सैंपलों की टेस्टिंग की रिपोर्ट पास हो जाना वह भी सवालों के घेरे में हैं । टेस्टिंग का कार्य भोपाल की हाईटेक लैब को दिया गया था जो कि भोपाल ब्रिज और जबलपुर ब्रिज के सैंपल टेस्टिंग का कार्य कर रही है।

पुराने ढर्रे में ही चलेगी पाइल लोड टेस्टिंग की प्रक्रिया
पाइल टेस्टिंग फ्लाईओवर निर्माण में एक बड़ी टेस्टिंग होती है जिसे हम पाइल लोड टेस्ट कहते हैं इस टेस्ट में १५ मीटर एक बड़ा प्लेटफॉर्म तैयार किया जाता है जिसमें कि लोहे के गर्डर लगाए जाते हैं गर्डर के ऊपर २०००-३००० बोरिया भरकर पाइल का लोड टेस्ट किया जाता है और लोड देखकर यह चेक किया जाता है कि कहीं पाइल बैठ तो नहीं रही है। जो कि कंपनी द्वारा आखिर बार फ्लाईओवर निर्माण प्रक्रिया में किसी भी पाइल में यह टेस्ट नहीं किया गया था और धड़ाधड़ पाइल खड़े कर दिए गए थे। एनएबीएल एटेस्टिंग एजेंसी और सरकारी लैब द्वारा पाइल लोड टेस्ट किया जाना चाहिए परन्तु ऐसा नहीं हुआ। कहीं भी पाइल लोड टेस्ट होता नहीं दिखा अर्थात पाइल लोड टेस्ट की टेस्टिंग की प्रोसेस इतनी बृहद है जब यह टेस्टिंग होगी तो लगभग शहर की जनता इसे स्वयं अपनी आंखों से देख सकती है परंतु साइट पर इस प्रकार की कोई भी लोडिंग टेस्टिंग नहीं होती दिखी।

 

पाइल इंटीग्रिटी टेस्ट को लेकर भीअधिकारियों के पास नहीं है जबाब
मोर्थ के नियमानुसार किसी भी ब्रिज निर्माण में पाइल इंटीग्रिटी टेस्ट होना बहुत आवश्यक है, परंतु दमोह नाका मदन महल ब्रिज निर्माण के दौरान पाइल इंटीग्रिटी टेस्ट कहीं भी होता नहीं दिखा‌ ना ही इनका कोई विटनेस भी मौजूद है। हर पाइल में उपर से वेव भेजकर ३० मीटर तक पाइल इंटीग्रिटी टेस्ट किया जाता है जो कि प्रत्येक पाइल में किया जाता है। यह टेस्ट बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक्स-रे और वाय रे की प्रोसेस है। ठीक वैसे ही वेव भेज कर यह देखा जाता है कि डाटा में किधर लूपहोल्स है और मटेरियल कहां कितना लगा हुआ है, कितना लोहा और कितना स्वाइल लगा हुआ है।

टिन के शेड ने गायब कर दी सर्विस रोड
नियमानुसार फ्लाईओवर के बजट में ९०० मीटर विस्तारीकरण के कार्य में सर्विस रोड का भी प्रावधान है परंतु ठेका कंपनी द्वारा टिन के शेड लगाकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। जिसके चलते हैं दमोह नाका से चंडाल भाटा के मध्य लगातार जाम की स्थिति भी निर्मित हो रही है और इस टिन के शेड की दीवार पर मुरूम डालकर सतत् रूप से प्रदूषण बढ़ाया जा रहा है।करोड़ों के इस अतिरिक्त विस्तारीकरण के कार्य में सर्विस रोड बनाना आवश्यक है जिसके लिए बाकायदा प्रशासन द्वारा बजट भी पारित किया जाता है और इस बजट में सर्विस रोड का प्रावधान भी परंतु निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया और टिन शेड की दीवार बनाकर ठेका कंपनी ने कार्य प्रारंभ कर दिया है। जाम होने के चलते किसी बड़ी दुर्घटना की होने की संभावना बनी हुई है

पल्ला झाड़ते अधिकारी
मामले को लेकर जब अधिकारियों से संबंध में बात करने का प्रयास किया गया तो अधिकारियों से किसी भी प्रकार का कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया। अधिकारी वर्ग मामले को लेकर जल्द से जल्द समस्या सुलझाने की बात कहते नजर आए

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Yash Bharat

Editor With मीडिया के क्षेत्र में करीब 5 साल का अनुभव प्राप्त है। Yash Bharat न्यूज पेपर से करियर की शुरुआत की, जहां 1 साल कंटेंट राइटिंग और पेज डिजाइनिंग पर काम किया। यहां बिजनेस, ऑटो, नेशनल और इंटरटेनमेंट की खबरों पर काम कर रहे हैं।

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