डायल 112 – सूची पुराण, मनोकामनाएं और ‘अटल’ कप्तान, थाने की चाहत में खेला कर गए बिहारी, चेकिंग का चक्रव्यूह और रेत डंपरों का फ्री पास, आईपीएल पिच पर क्राइम की नेट प्रैक्टिस

सूची पुराण, मनोकामनाएं और ‘अटल’ कप्तान

इन दिनों शहर की वर्दियों में कानून से अधिक सूची दर्शन का क्रेज देखने को मिल रहा है। जिनकी हाल ही में कप्तान ने क्लास ली, वे ट्रांसफर लिस्ट को ऐसे देख रहे हैं मानो यह कोई वरदान पत्र हो, बस नाम आए और सारे कष्ट दूर हो जाएं। वहीं जो स्वयं को कप्तान की गुडबुक में मानते हैं, वे मन ही मन प्रार्थना कर रहे हैं कि उन्हें यथास्थान ही बनाए रखा जाए।
इधर कुछ वर्दीधारी कप्तान के तबादले की कल्पनाओं में ऐसे खोए हैं जैसे कोई बड़ा बदलाव बस आने ही वाला हो, तो उधर कुछ लोग उनके बने रहने में ही अपनी स्थिरता और सुरक्षा देख रहे हैं। मगर अंदरखाने की खबर यह भी है कि कप्तान सब समझ रहे हैं, कौन उनके शुभचिंतक हैं और कौन मन ही मन विदाई गीत का अभ्यास कर रहा है।लेकिन इस पूरे सूची पुराण के बीच एक सच्चाई धीरे धीरे स्पष्ट होती दिख रही है कि कप्तान कहीं जाने वाले नहीं हैं। और शायद यही कारण है कि शहर में अपराध भी पहले की अपेक्षा कम होते नजर आ रहे हैं। सख्ती और अनुशासन का असर दिखने लगा है, भले ही कुछ लोगों को यह रास न आ रहा हो।अंततः तबादला भले ही एक प्रशासनिक प्रक्रिया हो, पर यहां यह उम्मीद, चिंता और व्यंग्य का ऐसा संगम बन गया है, जहां सूची केवल पोस्टिंग नहीं बल्कि कई दिलों की धड़कन तय कर रही है।
थाने की चाहत में खेला कर गए बिहारी

डायल 112 मन की घंटी तो पहले ही बजा चुकी थी, पर सुनवाई वहीं होती है जहां इच्छा प्रबल हो। प्रस्ताव सामने था, सम्मान सहित था, लेकिन नजरें किसी और मनपसंद थाने पर टिकी थीं। अनुभव भी कमाल की चीज है, खासकर तब जब वह लाइन अटैच की पृष्ठभूमि से होकर आया हो, तब चयन भी काफी सोच समझकर किया जाता है।घमापुर जैसा चर्चित थाना सामने था, मगर चाहत कहीं और की थी। कहते हैं जब मन में थाना बस जाए तो व्यवस्था भी उसी दिशा में बहने लगती है। और जब चाहत के साथ नाम के अंत में बिहारी जुड़ा हो, तो खेला होने की चर्चा अपने आप रंग पकड़ लेती है।संयोग से एक कुर्सी खाली हुई और जनाब ने ऐसा सधा हुआ कदम बढ़ाया कि सीधे उसी पर विराजमान हो गए, बिना किसी जल्दबाजी के लेकिन पूरी तैयारी के साथ। अब हाल यह है कि जो थाना कभी विकल्प था वह इतिहास हो गया और जो चाहत थी वह वर्तमान बन गई। क्राइम मीटिंग में भी नए प्रभारी के रूप में उनका ठाठ अलग ही नजर आया।अब गलियारों में धीमी मुस्कान के साथ एक ही जुमला तैर रहा है कि थाने की चाहत में खेला कर गए बिहारी।
चेकिंग का चक्रव्यूह और रेत डंपरों का फ्री पास

शहर के यातायात विभाग के एक बड़े अधिकारी इन दिनों बाईपास पर चेकिंग का ऐसा जाल बिछाए बैठे हैं कि आम वाहन चालकों को लगता है मानो हर मोड़ पर कानून तैनात हो। हेलमेट, सीट बेल्ट और दस्तावेजों की जांच इतनी बारीकी से होती है कि राहगीर भी अनुशासन का पाठ याद कर लें। कार्रवाई भी कुछ इस अंदाज में होती है कि पूरा दृश्य किसी फिल्मी सीन जैसा प्रतीत होता है।लेकिन इसी सख्ती के बीच एक अलग ही कहानी भी चलती नजर आती है। नर्मदा किनारे के बाईपास से आने वाले रेत से भरे डंपर, कई बार बिना नंबर प्लेट के, धड़ल्ले से गुजरते रहते हैं। न उन्हें रोकने की जल्दी, न कागजों की जांच की जरूरत, मानो उनके लिए नियमों का अलग संस्करण लागू हो।विडंबना यह है कि सबसे ज्यादा हादसे भी इसी मार्ग पर देखने को मिलते हैं, जहां ये भारी वाहन बेलगाम दौड़ते हैं। मगर कार्रवाई की रोशनी वहां कम और दिखावे की सख्ती ज्यादा नजर आती है।अब लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि यहां कानून सबके लिए बराबर है, बस नर्मदा के रेत वाले डंपरों के लिए थोड़ा लचीला है।
आईपीएल पिच पर क्राइम की नेट प्रैक्टिस

आईपीएल का सीजन अपने पूरे शबाब पर है। मैदान में चौके छक्के और बाहर सटोरियों की जमकर बल्लेबाजी चल रही है। खास बात यह है कि इस पूरे खेल की मुख्य पिच पुणे बताई जा रही है, जहां से सट्टे का संचालन हो रहा है।उधर कटनी पुलिस ने गोवा कनेक्शन तक पहुंचकर सट्टा गैंग को पकड़ लिया, यानी टीम ने बाहर जाकर विकेट भी गिरा दिए। लेकिन अपने शहर की क्राइम ब्रांच अभी तक पुणे की पिच तक पहुंचने की तैयारी में ही नजर आ रही है।आधा आईपीएल निकल चुका है, सट्टा पूरे फॉर्म में है, पर कार्रवाई अब भी ड्रेसिंग रूम में बैठी रणनीति बनाती दिख रही है। लोग तंज कस रहे हैं कि कटनी टीम गोवा तक खेल गई और हमारी क्राइम ब्रांच अभी नेट प्रैक्टिस में ही है।कुल मिलाकर हालात ऐसे हैं कि सट्टे का मैच तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन शहर की कार्रवाई अभी भी टॉस का इंतजार करती नजर आ रही है।








