ट्विशा शर्मा केस: CBI की अधूरी चार्जशीट बनी ढाल, कोर्ट ने खारिज की समर्थ की डिफॉल्ट बेल

ट्विशा शर्मा केस: CBI की अधूरी चार्जशीट बनी ढाल, कोर्ट ने खारिज की समर्थ की डिफॉल्ट बेल
भोपाल, यशभारत। मॉडल व एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह को अदालत से बड़ा झटका लगा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शोभना भलावे की कोर्ट ने समर्थ सिंह की डिफॉल्ट जमानत याचिका को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि अपराध की प्रकृति और मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।
क्या है अधूरी चार्जशीट का दांव?
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तकनीकी कानूनी आधार को हथियार बनाते हुए दलील दी। वकील का तर्क था कि समर्थ सिंह को 23 मई को गिरफ्तार किया गया था। कानूनन 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर चालान पेश करना अनिवार्य होता है, लेकिन सीबीआई ने 17 अगस्त को महज दस्तावेजों का बंडल अदालत में पेश कर दिया और जांच जारी रहने की बात कही। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि समर्थ को जमानत से रोकने के लिए सीबीआई ने जल्दबाजी में ‘अधूरा चालान’ पेश किया है, जो वैध चालान की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में धारा 187(3) के तहत आरोपी को डिफॉल्ट जमानत पाने का सीधा अधिकार बनता है।
CBI और परिजनों की तीखी आपत्ति
दूसरी ओर, सीबीआई के प्रॉसिक्यूटर और मृतका ट्विशा शर्मा के परिजनों की ओर से पेश वकीलों ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि यह एक बेहद गंभीर और संवेदनशील अपराध है। जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए साक्ष्य और मामले की संगीनता को दरकिनार कर केवल तकनीकी आधार पर आरोपी को राहत देना न्यायसंगत नहीं होगा।
अदालत का संदेश: गंभीरता के आगे फीकी पड़ी तकनीकी दलील
अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अपना रुख स्पष्ट कर दिया। कोर्ट ने माना कि यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और केवल जांच प्रक्रिया में लगे समय या चालान के प्रारूप की आड़ लेकर जमानत का दावा नहीं किया जा सकता। अदालत के इस फैसले से सीबीआई को मामले की तह तक पहुंचने और पुख्ता सबूत जुटाने के लिए अतिरिक्त समय व मजबूती मिल गई है।







