भोपालमध्य प्रदेश

हर उम्र में बढ़ रहीं हड्डी और जोड़ों की बीमारियां लाइफस्टाइल सबसे बड़ा कारण विशेषज्ञ बोले कम उम्र में भी कमर-घुटने का दर्द बढ़ा, नई तकनीकों से आसान हुआ इलाज

हर उम्र में बढ़ रहीं हड्डी और जोड़ों की बीमारियां लाइफस्टाइल सबसे बड़ा कारण

विशेषज्ञ बोले कम उम्र में भी कमर घुटने का दर्द बढ़ा, नई तकनीकों से आसान हुआ इलाज

 

भोपाल यश भारत । हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी बीमारियां अब तेजी से हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही हैं। एक समय जहां इन्हें केवल बुजुर्गों की समस्या माना जाता था वहीं अब युवाओं में भी कमर और घुटनों के दर्द के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ ने खास बातचीत में बताया कि बदलती लाइफस्टाइल गलत पोस्चर और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है। विशेषज्ञ के अनुसार वर्तमान समय में सबसे ज्यादा कमर दर्द, घुटनों का दर्द, गर्दन दर्द सर्वाइकल, गठिया आर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस के मरीज सामने आ रहे हैं। खासतौर पर लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों में रीढ़ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।

उम्र के हिसाब से बदलता ट्रेंड

विशेषज्ञ बताते हैं कि अलग-अलग उम्र में अलग तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं 20 से 35 वर्ष युवा इस वर्ग में कमर दर्द सर्वाइकल और स्लिप डिस्क के मामले तेजी से बढ़े हैं। मोबाइल और लैपटॉप का अधिक उपयोग और गलत पोस्चर इसका मुख्य कारण है।

इस उम्र में घुटनों का दर्द, जोड़ों में जकड़न और शुरुआती गठिया देखने को मिल रहा है। वजन बढ़ना और एक्सरसाइज की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। बुजुर्गों में गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा अधिक होता है। उम्र के साथ हड्डियों की मजबूती कम होने लगती है, जिससे छोटी चोट भी गंभीर बन सकती है।

घंटों बैठना बन रहा साइलेंट खतरा

विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना हड्डियों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। ऑफिस कर्मियों के साथ साथ बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

डाक्टर ने सावधानियां के बारे में विस्तृत जानकारी दी

हर 30 , 40 मिनट में ब्रेक लेकर टहलें

सीधी पीठ और सही पोस्चर में बैठें

स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें सपोर्ट वाली कुर्सी का उपयोग करें बीच बीच में स्ट्रेचिंग करें मोबाइल चलाते समय गर्दन ज्यादा न झुकाएं इलाज में आई आधुनिक क्रांति विशेषज्ञ के अनुसार अब हड्डियों और जोड़ों के इलाज में आधुनिक तकनीकों ने बड़ा बदलाव किया है।

 

हड्डी विशेषज्ञ ने उपलब्ध नई तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन

इंजेक्शन थेरेपी मिनिमल इनवेसिव सर्जरी , आर्थ्रोस्कोपी रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट इन तकनीकों से कम दर्द, जल्दी रिकवरी और बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

हर केस में सर्जरी जरूरी नहीं

विशेषज्ञ ने बताया कि अधिकांश मामलों में बिना ऑपरेशन के भी इलाज संभव है। दवाइयों, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल सुधार से मरीज को राहत मिल सकती है। केवल गंभीर स्थिति में ही सर्जरी की जरूरत होती है।

गलत दिनचर्या बढ़ा रही खतरा

डॉक्टर के अनुसार आज की खराब लाइफस्टाइल, असंतुलित आहार और धूप की कमी के कारण कैल्शियम और विटामिन D की कमी तेजी से बढ़ रही है जिससे हड्डियां कमजोर हो रही हैं।

बच्चों और युवाओं के लिए खास सलाह , आउटडोर खेलों को बढ़ावा दें

विशेषज्ञों का मानना है कि हड्डियों और जोड़ों की समस्याएं अब हर उम्र के लिए चुनौती बन चुकी हैं। समय रहते सही लाइफस्टाइल, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाकर इनसे बचाव किया जा सकता है।

शासकीय अस्पताल जय प्रकाश चिकित्सालय के हड्डी रोग विशेषज्ञ ने दी जानकारी, बिना बड़े ऑपरेशन भी मिल रही राहत

विशेषज्ञ डॉ. मनोज मोदी ने बताया कि अब कमर, कंधे और घुटनों के दर्द का इलाज आधुनिक इंजेक्शन थेरेपी के माध्यम से भी प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। डॉ. मनोज मोदी के अनुसार कई मामलों में मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती और इंजेक्शन के जरिए दर्द और सूजन को नियंत्रित कर बेहतर परिणाम मिलते हैं। यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जो लंबे समय से दर्द से जूझ रहे हैं या ऑपरेशन से बचना चाहते हैं। डॉ. मोदी ने बताया कि नई चिकित्सा पद्धतियों में इंजेक्शन थेरेपी एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है। इसके जरिए कमर, कंधे और घुटनों में होने वाले दर्द को कम किया जा सकता है और मरीज को जल्दी राहत मिलती है।

 

 

*यश भारत न्यूज़ संवाददाता संकेत नाईक ने की डॉक्टर मनोज मोदी से खास बातचीत*

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