जबलपुर से राज्यसभा सांसद विवेक तंखा के सवाल पर बड़ा खुलासा
आयुष्मान भारत योजना में 3,167 अस्पतालों की धांधली उजागर

जबलपुर/नई दिल्ली। राज्यसभा में जबलपुर से कांग्रेस सांसद विवेक के. तंखा द्वारा पूछे गए सवाल ने देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) में भारी गड़बड़ियों को उजागर कर दिया है।स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल राज्यसभा में गूंजे। जबलपुर से कांग्रेस सांसद विवेक के. तंखा ने 19 अगस्त 2025 को पूछे गए प्रश्न (संख्या 2999) में केंद्र सरकार से जानकारी मांगी थी कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत कितने अस्पतालों को गड़बड़ियों का दोषी पाया गया, किस प्रकार की अनियमितताएं हुईं और अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
राज्यसभा सांसद द्वारा पूछे गए सवाल
1. कितने अस्पताल गड़बड़ियों और नियम उल्लंघन में पकड़े गए?
2. उनकी अनियमितताएं किस प्रकार की थीं – फर्जी क्लेम, ओवरचार्जिंग या सेवाओं से इनकार?
3. दोषी अस्पतालों पर क्या कार्रवाई की गई – डी-एम्पैनलमेंट, रिकवरी या कानूनी कार्यवाही?
4. अब तक कितने फर्जी क्लेम पकड़े गए और कितनी राशि वापस वसूल की गई?
5. भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए निगरानी और ऑडिट सिस्टम को कैसे मजबूत किया जा रहा है?
सरकार का जबाव – 3,167 अस्पताल दोषी
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि योजना की शुरुआत से अब तक 3,167 अस्पतालों को विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं और नियम उल्लंघन का दोषी पाया गया है। यह संख्या दिखाती है कि देशभर में लाभार्थियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर किस तरह का संकट मंडरा रहा है।
गड़बड़ियों की हकीकत
दोषी अस्पतालों द्वारा –फर्जी क्लेम पेश करना,
मरीज़ों से तय दर से अधिक राशि वसूलना,
लाभार्थियों को इलाज से वंचित करना
जैसी गंभीर गड़बड़ियां की गईं।
सरकार की कार्रवाई-
मंत्री प्रतापराव जाधव ने सदन को बताया कि अब तक –
1,114 अस्पतालों को डी-एम्पैनल किया गया,
1,504 अस्पतालों पर ₹122 करोड़ का जुर्माना लगाया गया,
549 अस्पताल निलंबित किए गए हैं।
सख्त निगरानी व्यवस्था
धोखाधड़ी रोकने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) के तहत नेशनल एंटी-फ्रॉड यूनिट (NAFU) और राज्यों में स्टेट एंटी-फ्रॉड यूनिट (SAFU) गठित की गई हैं। साथ ही रियल टाइम डैशबोर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।







