सावधान भोपाल! आपके घर का नल मौत तो नहीं उगल रहा?

सावधान भोपाल! आपके घर का नल मौत तो नहीं उगल रहा?
इंदौर में 15 मौतों के बाद अब राजधानी के गटर-वाटर’सिस्टम पर महाविस्फोट!
भोपाल,यशभारत। मध्य प्रदेश में नल जल योजना अब ‘नल अंत योजना बनती जा रही है। इंदौर के भागीरथपुरा में एक साथ 15 अर्थियाँ उठने के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप है, लेकिन सबसे डरावनी तस्वीर राजधानी भोपाल से आ रही है। भोपाल की मल्टियों और बस्तियों में प्रशासन पिछले 10 सालों से धीमा जहर परोस रहा है।
गटर के ऊपर बिछी हैं जिंदगी की लाइनें
इंदौर में तो पाइपलाइन अब फूटी है, लेकिन भोपाल के वाजपेयी नगर, कमला नगर, भानपुर, 12 नंबर और इंदिरा नगर जैसे इलाकों में तो सालों से सीवेज और पीने का पानी एक ही पाइप से दोस्ती निभा रहे हैं। वाजपेयी नगर की ए-10 मल्टी की हकीकत रोंगटे खड़े कर देगी यहाँ सीवेज के गहरे चैंबर के अंदर ही पानी की लाइन का वाल्व है। जब गटर भरता है, तो वही पानी सीधे आपके किचन के नलों में पहुँचता है। शहर के पॉश इलाकों के करीब बसी ये मल्टियां आज बीमारियों का डिपो बन गई हैं। लोग पेट दर्द से तड़प रहे हैं, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में कुछ नहीं आता। यह दूषित पानी का वह स्लो पॉइजन है जो धीरे-धीरे लीवर और किडनी को खत्म कर रहा है।
इंदौर से आई रिपोर्ट ने पूरे एमपी को दहलाया
महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की फाइनल रिपोर्ट ने आधिकारिक पुष्टि कर दी की भागीरथपुरा की 15 मौतों का गुनहगार सीवेज मिक्स पानी ही है। अभी भी 201 लोग (जिनमें 16 मासूम बच्चे हैं) मौत से लड़ रहे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने खुद माना कि ड्रेनेज लीकेज ही इस कत्लेआम की वजह है।
कोर्ट और मानवाधिकार आयोग की एंट्री
भोपाल से लेकर जबलपुर तक हड़कंप मचा है:
हाईकोर्ट की फटकार: जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सरकार से पूछा है जनता को जहर क्यों पिलाया जा रहा है? वही मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब तलब किया है।
भोपाल के लोग अब दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय सोशल मीडिया पर वीडियो डाल रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगली अर्थी उनके घर से न उठ जाए।







