सावन की फुहारों के बीच यश भारत मंच में सजा रक्षाबंधन का काव्य संसार
ज्योत्सना शर्मा, बसंत कुमार शर्मा और अर्चना गोस्वामी ने गीत-दोहों से बांधा समां, सुरेश मिश्र विचित्र ने भी दी काव्य प्रस्तुति

यश भारत, जबलपुर। सावन की रिमझिम फुहारों और रक्षाबंधन के पावन पर्व की आत्मीयता के बीच यश भारत के स्टूडियो में आयोजित विशेष कवि गोष्ठी में साहित्य, संस्कृति और भाई-बहन के प्रेम की भावनाएं कविताओं और गीतों के माध्यम से जीवंत हो उठीं। कार्यक्रम का आयोजन ‘क्राइम टाइम विद आशीष शुक्ला’ के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम में नगर के चुनिंदा कवियों और कवयित्रियों ने रक्षाबंधन को केंद्र में रखकर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए आशीष शुक्ला ने कहा कि पत्रकारिता के साथ साहित्य को मंच देने की यह पहल निरंतर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने रक्षाबंधन को प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों का पर्व बताते हुए कवियों का स्वागत किया।
कवयित्री ज्योत्सना शर्मा ने अपने छोटे भाई विश्वास को समर्पित रचना में भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते को शब्द दिए। उनके गीत में बचपन की यादों, ठिठोली और स्नेह के साथ रक्षाबंधन की भावनाएं उभरकर सामने आईं। उन्होंने भगवान शिव की स्तुति भी प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने सराहा।
दोहों के राजकुमार बसंत कुमार शर्मा ने रक्षाबंधन पर दोहों और गीतों की प्रभावी प्रस्तुति दी। उनकी पंक्तियों में राखी को केवल धागा नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास का बंधन बताया गया। उन्होंने परिवार, नारी सम्मान और बचपन की स्मृतियों को भी अपनी रचनाओं में पिरोया।
वहीं कवयित्री अर्चना गोस्वामी ने रक्षाबंधन पर आधारित गीत प्रस्तुत कर भाई-बहन के अनूठे प्रेम और रक्षा के वचन को स्वर दिया। उनकी रचना में देश की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान और बहन की भावनाओं को भी स्थान मिला। सुरेश मिश्र ‘विचित्र’ ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति से कार्यक्रम को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।
पूरे कार्यक्रम में सावन, राखी, बचपन, परिवार, प्रेम और देशभक्ति के रंग दिखाई दिए। रचनाओं पर श्रोताओं की तालियों से स्टूडियो गूंजता रहा।






