एम्स भोपाल के शोध में खुलासा, डायपर के सही इस्तेमाल में शहरी माताएं ग्रामीणों से अधिक जागरूक सुरक्षित निपटान और स्वच्छता को लेकर दोनों वर्गों में जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य शिक्षा पर दिया गया जोर

एम्स भोपाल के शोध में खुलासा, डायपर के सही इस्तेमाल में शहरी माताएं ग्रामीणों से अधिक जागरूक
सुरक्षित निपटान और स्वच्छता को लेकर दोनों वर्गों में जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य शिक्षा पर दिया गया जोर
भोपाल यश भारत। शिशुओं की देखभाल में तेजी से बढ़ रहे डायपर के उपयोग के बीच एम्स भोपाल के एक शोध में सामने आया है कि डायपर के सही इस्तेमाल को लेकर शहरी माताएं ग्रामीण माताओं की तुलना में अधिक जागरूक हैं। हालांकि, इस्तेमाल किए गए डायपर के सुरक्षित निपटान और हाथों की स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की माताओं में जानकारी की कमी पाई गई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन विषयों पर व्यापक स्वास्थ्य शिक्षा की आवश्यकता है। एम्स भोपाल के नर्सिंग कॉलेज की एमएससी नर्सिंग (पीडियाट्रिक नर्सिंग) बैच 2024 की छात्रा मीना ने यह तुलनात्मक अध्ययन किया। शोध डॉ. ममता वर्मा और सह मार्गदर्शक कुमारास्वामी ए.पी. के निर्देशन में भोपाल के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया। अध्ययन में 0 से 36 माह तक के डायपर पहनने वाले बच्चों की 276 माताओं को शामिल किया गया, जिनमें 138 शहरी और 138 ग्रामीण क्षेत्र की थीं। शोध के अनुसार शहरी माताओं का औसत ज्ञान स्कोर 14.47 रहा जबकि ग्रामीण माताओं का स्कोर 12.51 दर्ज किया गया। शहरी क्षेत्र की 40.6 प्रतिशत माताओं को डायपर के सही उपयोग की अच्छी जानकारी थी जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा केवल 14.5 प्रतिशत रहा। वहीं कम जानकारी रखने वाली माताओं की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक पाई गई। अध्ययन में यह भी सामने आया कि डायपर का सही चयन समय पर बदलना और बच्चे की त्वचा की देखभाल जैसे मामलों में शहरी माताओं की समझ बेहतर है। लेकिन हाथ धोने की आदत और इस्तेमाल किए गए डायपर के सुरक्षित निपटान को लेकर दोनों ही वर्गों में जागरूकता अपेक्षाकृत कम मिली। डायपर का गलत उपयोग बच्चों में रैश त्वचा में जलन फंगल संक्रमण और गंभीर जीवाणु संक्रमण जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में सही समय पर डायपर बदलना बच्चे की त्वचा को साफ एवं सूखा रखना डायपर बदलने से पहले और बाद में हाथ धोना तथा उपयोग किए गए डायपर का सुरक्षित निपटान करना बेहद आवश्यक है। शोध के निष्कर्षों में कहा गया है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की माताओं के लिए डायपर उपयोग स्वच्छता और सुरक्षित निपटान से संबंधित स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। इससे न केवल शिशुओं को संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं से बचाया जा सकेगा बल्कि स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।







