
यश भारत, जबलपुर।
गौतम अडानी मेरे मित्र, पर दूंगा निष्पक्ष राय: करंजवाला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (PTI) द्वारा जारी किए गए वीडियो के अनुसार, एडवोकेट रायन करंजवाला ने बातचीत की शुरुआत में पूरी पारदर्शिता बरतते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा, “इससे पहले कि मैं इस आदेश के महत्व को समझाऊं, मैं लोगों को यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि जिन भी मामलों में मैं अडानी ग्रुप की तरफ से पेश हो रहा हूँ, वहाँ मैं यह साफ रखता हूँ कि अडानी ग्रुप मेरे मुवक्किल (क्लाइंट) हैं और मिस्टर गौतम अडानी मेरे मित्र हैं। इसके बावजूद, मैं इस मामले पर पूरी तरह से एक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण सामने रखूँगा।”
अमेरिका और भारत में कानूनी प्रक्रिया एक समान
जब वकील करंजवाला से पूछा गया कि क्या जज का यह आदेश एक सामान्य प्रक्रियात्मक कदम है? तो उन्होंने इसका जवाब ‘हाँ’ में दिया। उन्होंने भारत और अमेरिका की कानूनी व्यवस्था की तुलना करते हुए समझाया कि।
अभियोजन का अधिकार: अमेरिका हो या भारत, दोनों ही देशों में अभियोजन पक्ष के पास यह तय करने का पूरा अधिकार होता है कि वे किस मामले को आगे बढ़ाना चाहते हैं और किसे बंद करना चाहते हैं।
अदालत की अनुमति अनिवार्य: अभियोजन पक्ष अपनी मर्जी से किसी भी मामले को एकतरफा तरीके से उठाकर ‘डस्टबिन’ में नहीं डाल सकता (यानी सीधे बंद नहीं कर सकता)।
अंतिम प्रक्रिया: यदि उन्हें किसी केस को वापस लेना या बंद करना है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से अदालत के समक्ष जाकर कोर्ट से इसकी अनुमति (Leave of the Court) मांगनी पड़ती है।
“फिलहाल कोर्ट में जो कुछ भी देखने को मिल रहा है, वह उसी सामान्य कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है जिससे होकर अभियोजन पक्ष को गुजरना पड़ता है।”
— एडवोकेट रायन करंजवाला







