इलाज मिलने से पहले ही टूटती सांसें: आपातकालीन सुविधाओं का घोर संकट, 108 एम्बुलेंस वाहन नदारद

मंडला। आदिवासी बाहुल्य एवं दूरस्थ वनांचल क्षेत्र मवई में आज भी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सुलभ नहीं हो सकी हैं। शासन द्वारा संचालित महत्त्वाकांक्षी 108 एम्बुलेंस सेवा का लाभ क्षेत्र के ग्रामीणों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे अधिक खामियाजा गर्भवती महिलाओं, सर्पदंश पीड़ितों, सड़क दुर्घटना में घायल लोगों तथा गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध न होने के कारण कई मरीजों को निजी वाहनों या अन्य अस्थायी साधनों से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है, जिससे उपचार में देरी होती है और कई बार मरीज की जान पर भी बन आती है। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम पंचायत सदस्य एवं स्थानीय युवक लक्ष्मी कांत पाठक ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मवई मुख्यालय में 108 एम्बुलेंस की स्थायी तैनाती करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए केवल अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए मजबूत आपातकालीन परिवहन व्यवस्था भी आवश्यक है।
50 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है मवई विकासखंड
लक्ष्मी कांत पाठक ने बताया कि मवई विकासखंड मंडला जिले का सबसे बड़ा और भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत दुर्गम वनांचल क्षेत्र है। यह क्षेत्र लगभग 50 किलोमीटर से अधिक दूरी में फैला हुआ है, जहां अनेक गांव घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में बसे हुए हैं। इन गांवों के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मुख्य रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मवई पर निर्भर हैं। लेकिन एम्बुलेंस की स्थायी व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि शासन स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। हाल ही में मवई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो नए चिकित्सकों की पदस्थापना भी की गई है, जिससे ग्रामीणों को बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद जगी है। इसके बावजूद यदि मरीज अस्पताल तक समय पर नहीं पहुंच पाएंगे तो इन सभी प्रयासों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा।
मवई क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों की हजारों की आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मवई पर निर्भर है। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्घटना, हार्ट अटैक, गंभीर बीमारी या अन्य आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस के लिए कॉल करने पर कई बार जवाब मिलता है कि एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है या दूर किसी अन्य स्थान पर व्यस्त है। ऐसे में मरीजों को निजी वाहन, ऑटो, ट्रैक्टर, पिकअप या अन्य साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार उपचार में होने वाली थोड़ी-सी देरी भी कई बार मरीज की हालत को गंभीर बना देती है। गरीब परिवारों को निजी वाहन की व्यवस्था करने में आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। कई बार वाहन मिलने में ही काफी समय निकल जाता है।
वर्षा ऋतु में और बढ़ जाती है परेशानी
मवई का अधिकांश क्षेत्र वनांचल और ग्रामीण इलाकों में स्थित है। बरसात के मौसम में कई संपर्क मार्ग कीचड़युक्त हो जाते हैं और कुछ स्थानों पर छोटे नाले उफान पर होने से आवागमन प्रभावित होता है। ऐसे समय में यदि किसी गांव में कोई गंभीर मरीज हो जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मवई मुख्यालय में स्थायी रूप से 108 एम्बुलेंस उपलब्ध रहे तो आसपास के गांवों तक कम समय में पहुंचकर मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सकता है। इससे अनेक लोगों की जान बचाई जा सकती है।
प्रसूताओं और सर्पदंश पीड़ितों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
मवई क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार दूरस्थ वन क्षेत्रों में निवास करते हैं। यहां गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाना अत्यंत आवश्यक होता है। लेकिन एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं होने से कई बार प्रसूताओं को निजी वाहनों या अन्य साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे मां और नवजात दोनों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसी प्रकार वर्षा ऋतु में सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। सर्पदंश के मामलों में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज को समय पर उपचार नहीं मिले तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को भी तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है, लेकिन एम्बुलेंस की कमी के कारण उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों ने की स्थायी एम्बुलेंस तैनाती की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अस्पतालों में चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की उपलब्धता और स्वास्थ्य अधोसंरचना को बेहतर बनाया जा रहा है। लेकिन यदि मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए प्रभावी आपातकालीन परिवहन व्यवस्था ही उपलब्ध नहीं होगी, तो इन सुविधाओं का पूरा लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मवई मुख्यालय में एक 108 एम्बुलेंस की स्थायी तैनाती तत्काल सुनिश्चित की जाए, ताकि दुर्घटना, प्रसव, सर्पदंश और अन्य गंभीर परिस्थितियों में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके। उनका कहना है कि यह केवल सुविधा का नहीं बल्कि हजारों ग्रामीणों के जीवन और सुरक्षा का प्रश्न है। यदि शीघ्र निर्णय लिया जाता है तो मवई सहित आसपास के 100 से अधिक गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकेगी।







