राजधानी के बाजारों में हादसे का खतरा

राजधानी के बाजारों में हादसे का खतरा
– न्यू मार्केट से बैरागढ़ तक अव्यवस्थाओं पर सवाल
– कहीं फुटपाथों से कब्जे हटे तो कहीं रसूखदारों के निर्माणों पर कार्रवाई का इंतजार
भोपाल, यशभारत। राजधानी में अतिक्रमण विरोधी मुहिम को लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। न्यू मार्केट में आगजनी की घटना के बाद निगम ने फुटपाथों, गुमटियों और अस्थायी काउंटरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार ट्रक सामान जब्त किया। हालांकि, शहर के कई प्रमुख बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में अतिक्रमण की समस्या अब भी बनी हुई है। त्योहारों के दौरान बढ़ती भीड़ और संकरी होती सड़कों के बीच अग्निशमन व्यवस्था तथा आपातकालीन रास्तों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

न्यू मार्केट : आग के बाद कार्रवाई, फिर भी सुरक्षा की चुनौती
न्यू मार्केट में हाल ही में हुई आगजनी के बाद नगर निगम ने फुटपाथों से अस्थायी टीन शेड, हैंगिंग डिस्प्ले और अवैध काउंटर हटाने की कार्रवाई की। बाजार में दुकानों के सामने तक सामान फैलने से रास्ते संकरे होने की शिकायतें हैं। आगजनी के दौरान दमकल वाहनों की पहुंच में बाधा आने की बात भी सामने आई। ऐसे में त्योहारों के समय बाजार में भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन रास्ते खुले रखना बड़ी चुनौती है।
बड़ा तालाब : प्रतिबंधित क्षेत्र में कब्जों का मुद्दा
बड़ा तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों के निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो रही है। सरकारी रिकॉर्ड में तालाब के 50 मीटर के दायरे में 340 से अधिक अवैध कब्जे और फार्म हाउस चिह्नित किए जाने का उल्लेख किया गया है। एनजीटी और उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
चौक बाजार और इब्राहिमपुरा : फायर हाइड्रेंट व्यवस्था पर सवाल
पुराने भोपाल के चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में त्योहारों के दौरान भारी भीड़ रहती है। दुकानों के बाहर रखे काउंटर और सामान आवागमन को प्रभावित करते हैं। यहां आगजनी से निपटने के लिए लगाए गए अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम के रखरखाव और उपयोगिता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि आपात स्थिति में दमकल व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम नहीं करती है, तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
कोहेफिजा और अरेरा कॉलोनी : व्यावसायिक निर्माणों पर कार्रवाई का इंतजार
कोहेफिजा और अरेरा कॉलोनी के कुछ क्षेत्रों में आवासीय उपयोग वाले भूखंडों पर नियमों के विपरीत व्यावसायिक भवन बनाए जाने की शिकायतें हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि ऐसे मामलों में नोटिस जारी करने के बाद ठोस कार्रवाई नहीं होती। लोगों का कहना है कि छोटे अतिक्रमणों पर तत्काल कार्रवाई करने वाले विभागों को बड़े निर्माणों के मामलों में भी समान सख्ती दिखानी चाहिए।
नदीम रोड और जुमेराती : संकरी सड़कों पर बढ़ता दबाव
नदीम रोड और जुमेराती जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में दुकानों के बाहर सामान और अस्थायी काउंटर लगाए जाने से आवागमन प्रभावित होने की शिकायतें हैं। त्योहारों में ग्राहकों की बढ़ती संख्या के कारण पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को परेशानी होती है। इन क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने के साथ नियमित निगरानी और आपातकालीन रास्ते सुनिश्चित करना जरूरी है।
10 नंबर मार्केट और रोहित नगर : पार्किंग और फुटपाथों पर दबाव
अरेरा कॉलोनी के 10 नंबर मार्केट और रोहित नगर के व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानों के सामने सामान रखने तथा वाहनों की पार्किंग से रास्तों पर दबाव बढ़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कर पार्किंग और पैदल आवागमन की व्यवस्था सुधारी जाए।
बैरागढ़ कपड़ा मार्केट : भीड़ के बीच सुरक्षा की चिंता
बैरागढ़ के कपड़ा बाजार में त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में खरीदार पहुंचते हैं। दुकानों के सामने सामान फैलने और भीड़ बढ़ने से आवागमन प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में अतिक्रमण नियंत्रण, अग्निशमन उपकरणों की जांच और आपातकालीन निकासी के रास्ते खुले रखना जरूरी है।
संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स : अग्निशमन उपकरणों की जांच जरूरी
बैरागढ़ स्थित संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अग्निशमन उपकरणों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उपकरणों के रखरखाव और नियमित जांच में लापरवाही होने पर आगजनी के समय मुश्किलें बढ़ सकती हैं। त्योहारों के दौरान यहां सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण कर उपकरणों को चालू हालत में रखना आवश्यक है।
छोटे दुकानदारों पर सख्ती, बड़े निर्माणों पर भी हो समान कार्रवाई
शहर के नागरिकों और व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों पर अधिक सख्ती दिखाई जाती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई धीमी रहती है।






