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जबलपुर की डाक व्यवस्था से उठाया बड़ा सवाल, राज्यसभा में सरकार पर बरसे विवेक तंखा

नई दिल्ली, यश भारत। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने अपने गृह नगर जबलपुर का उदाहरण देकर केंद्र सरकार की कानून निर्माण प्रक्रिया पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस बदलाव को प्रशासनिक सुधार बताया जा रहा है, वही आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। तंखा ने बताया कि पहले अदालतों के नोटिस रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजे जाते थे और दो दिन में पहुंच जाते थे, लेकिन अब स्पीड पोस्ट अनिवार्य होने के बाद, मध्यप्रदेश में केवल भोपाल और इंदौर में हब होने के कारण वही नोटिस छह दिन में पहुंच रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह ‘फास्ट इंडिया’ के दौर में व्यवस्था को और धीमा करने का उदाहरण है।

‘मैकेनिकल’ तरीके से बन रहे हैं कानून

‘निरसन और संशोधन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान तंखा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बिना किसी प्रभाव आकलन (Impact Assessment) के महज यांत्रिक तरीके से कानून बना रही है। उन्होंने कहा कि कानूनों का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना होता है, लेकिन वर्तमान बदलाव कई मामलों में व्यवस्था को और जटिल बना रहे हैं।

आपदा प्रबंधन अधिनियम में बदलाव पर चिंता

तंखा ने आपदा प्रबंधन अधिनियम में किए गए संशोधनों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘आपदा रोकथाम’ शब्द को हटाकर ‘आपदा तैयारी’ कर दिया है, जिससे पूरे तंत्र का फोकस हादसे के बाद की तैयारियों और राहत तक सीमित हो जाएगा। उनका तर्क था कि सरकार की प्राथमिकता आपदाओं को रोकने और नुकसान कम करने की रणनीति होनी चाहिए।

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