फ्लाईओवर बना, लेकिन नीचे ‘अवैध पार्किंग’ का राज, यातायात विभाग की लापरवाही से रोज घुट रहा शहर
कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित

जबलपुर, यशभारत। शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लाईओवर बनाया गया, लेकिन अब फ्लाईओवर के नीचे अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और यातायात विभाग की उदासीनता ने हालात बदतर कर दिए हैं। मदन महल चौक से एलआईसी कार्यालय और रानीताल से मदन महल स्टेशन तक फ्लाईओवर के नीचे सड़कें अवैध पार्किंग में तब्दील हो चुकी हैं। सड़क किनारे कारें, लोडिंग वाहन, ऑटो और जीप घंटों खड़े रहते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
आगा चौक, बल्देवबाग, चेरीताल और दमोहनाका जैसे व्यस्त इलाकों में हालत यह है कि वाहन चालकों को निकलने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है। दोपहर में स्कूलों की छुट्टी के समय और शाम होते ही ट्रैफिक पूरी तरह रेंगने लगता है। फ्लाईओवर के नीचे अवैध ठेले-टपरे भी सड़क घेर लेते हैं, जिससे बची हुई जगह भी खत्म हो जाती है और जाम विकराल रूप ले लेता है।
स्थिति तब और खराब हो जाती है जब सड़क के एक हिस्से पर कतारबद्ध खड़े वाहनों के बीच से मेट्रो बसें और भारी वाहन गुजरने का प्रयास करते हैं। थोड़ी सी चूक पूरे मार्ग को जाम में बदल देती है। दूसरी ओर फुटपाथों पर फल-सब्जी के ठेले लग जाने से पैदल चलने वालों को भी सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरी अव्यवस्था के बावजूद यातायात विभाग की भूमिका केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित दिखाई देती है। कभी-कभार नो पार्किंग में खड़े कुछ वाहनों के चालान काटकर अभियान समाप्त कर दिया जाता है, लेकिन अगले ही दिन फिर वही हालात लौट आते हैं। न तो स्थायी अतिक्रमण हटाने की योजना बनाई जा रही है और न ही अवैध पार्किंग पर प्रभावी रोक लगाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि फ्लाईओवर के नीचे नियमित अतिक्रमण हटाओ अभियान, सख्त नो पार्किंग व्यवस्था और यातायात पुलिस की लगातार निगरानी नहीं की गई, तो करोड़ों रुपये की लागत से बने फ्लाईओवर भी शहर को जाम से राहत नहीं दिला पाएंगे। लोगों ने जिला प्रशासन और पुलिस से तत्काल सख्त कार्रवाई कर फ्लाईओवर के नीचे फैली अव्यवस्था समाप्त करने की मांग की है।








