
घोषणाओं का बजट, इंदौर-भोपाल पर फोकस, जबलपुर को फिर लगी निराशा हाँथ
जबलपुर, यश भारत। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को लेकर जबलपुर में एक बार फिर उपेक्षा के स्वर सुनाई दिए हैं। बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कर अधिवक्ता अभिषेक ध्यानी ने कहा कि इस बार भी विकास घोषणाओं का केंद्र मुख्य रूप से इंदौर, भोपाल और बुंदेलखंड क्षेत्र रहे, जबकि जबलपुर को औद्योगिक विकास के मामले में कोई ठोस सौगात नहीं मिली।
अभिषेक ध्यानी ने कहा कि बजट में उद्योगों के विस्तार को लेकर जबलपुर के लिए किसी भी प्रकार की नई विकास परियोजना सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक नीति में नए उद्योगों के साथ-साथ होटल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी को और मजबूत किया जाना चाहिए था, जिससे जबलपुर में निवेश का माहौल तैयार हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि शहर का विकास केवल फ्लाईओवर जैसी आधारभूत घोषणाओं से पूरा नहीं हो सकता। बजट में 2360 करोड़ रुपये के आर्थिक कॉरिडोर जैसे प्रावधान अन्य शहरों के लिए किए गए हैं, लेकिन जबलपुर को इस तरह की किसी बड़ी आर्थिक योजना में शामिल नहीं किया गया, जिससे स्थानीय व्यापारियों और युवाओं में निराशा है।
कर अधिवक्ता ध्यानी ने बताया कि लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी पूर्ति के लिए सरकार लगातार कर्ज पर निर्भर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि बीते 11 महीनों में लगभग 72,900 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है और हाल ही में 5,600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज भी लिया गया, जो राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा रहा है। हालांकि उन्होंने बजट के सकारात्मक पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों को राहत देने वाली हैं






