आगे पाठ पीछे सपाट की तर्ज पर हर साल पौधा रोपण

जबलपुर, यशभारत। बारिश का मौसम शुरू होते ही प्रति वर्ष पौधारोपण के लिए एक और जहां सरकारी स्तर पर पौधारोपण के लिए अभियान चलाए जाते हैं वहीं दूसरी ओर सामाजिक संगठन भी बड़ी संख्या में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं , लेकिन यदि जमीनी हकीकत की पड़ताल की जाए तो हर साल करोड़ों रुपए के खर्च से रोपे गए पौधे रखरखाव और देखरेख के अभाव में कुछ समय बाद ही दम तोड़ देते हैं। पौधारोपण करने वाले पलट कर भी नहीं देखते कि उनके द्वारा लगाए पौधे जीवित बचे हैं कि नहीं। पौधारोपण कर फ ोटो खिंचवा कर और सेल्फ ी लेकर समाचार पत्रों में प्रकाशित करवा कर अपने दायित्व की खानापूर्ति कर ली जाती है।
यदि बीते कुछ वर्षों की ही बात की जाए तो शासन ने ना जाने कितने करोड़ रुपए फूं क कर पौधारोपण अभियान चलाएं लेकिन यदि बीते सालों में जहां-जहां बृहद रूप में अभियान चलाकर पौधारोपण किया गया था वहां की स्थिति का जायजा लिया जाए तो जमीनी हकीकत कुछ और ही है । हजारों की तादाद में रौपे गए पौधों में से कुछ सैकड़ा पौधे ही बचे होंगे और यही सच्चाई भी है । अब जबकि एक बार फि र बारिश का मौसम शुरू हो गया है तो जगह-जगह पौधारोपण करने के लिए सामाजिक संगठनों ने भी कवायद शुरू कर दी है। वहीं, शासन ने भी एक बार फि र अंकुर अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत कोई भी नागरिक पौधारोपण कर अपनी फ ोटो वायुदूत ऐप पर भेज सकता है । इसके 30 दिन बाद फि र से पौधे की फ ोटो भेजनी होगी जिसके बाद चयन होने पर सरकार पुरस्कार देगी।
पिछले साल भी चलाया गया था अभियान
यह अभियान पिछले साल भी चलाया गया था लेकिन करोना के कारण नागरिकों ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। लेकिन शासन का दावा है कि इस साल अधिकतम लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा । शासन प्रशासन के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि सामाजिक संगठन शासकीय अधिकारी-कर्मचारी इस अभियान को गंभीरता से लेकर कार्य करें । यह भी कहा जा रहा है कि समय-समय पर अभियान की समीक्षा भी की जाएगी । अब देखने वाली बात यह है कि यह अभियान कितना सफ ल होता है या फि र इसका हाल भी बीते कुछ सालों में चलाए गए अभियान की तरह ही होता है । शासन स्तर पर जो अभियान चलाई जाते है उसके अलावा रोजाना सामाजिक राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों की पौधा रोपण करते हुए फ ोटो अखबारों में दिखने लगी हैं। होना तो यह चाहिए कि पौधारोपण करने वाले फ ोटो छपवाने की बजाएं पौधों के संरक्षण और उनके संवर्धन पर ध्यान दे तो ना केवल उनके प्रयासों को सार्थकता मिलेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी उनका यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।







