सुनील लोधी के भजनों और जसपिंदर नरूला के सूफियाना सुरों से गूंज उठीं संगमरमरी वादियां

जबलपुर, यशभारत। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों में शरद पूर्णिमा पर दो दिवसीय 23वें नर्मदा महोत्सव का शुभारंभ मां नर्मदा के पूजन के साथ हुआ। महोत्सव की पहली शाम भक्ति, लोकसंस्कृति और संगीत के नाम रही। लोकगायक सुनील लोधी के बुंदेली भजनों और पद्मश्री डॉ. जसपिंदर नरूला के गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी रहे, जबकि अध्यक्षता सांसद आशीष दुबे ने की। इस अवसर पर विधायक अजय विश्नोई, अशोक रोहाणी, नीरज सिंह, डॉ. अभिलाष पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने नर्मदा महोत्सव को सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और परंपराओं का प्रतीक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जबलपुर और आसपास के पर्यटन स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। सांसद आशीष दुबे ने कहा कि महोत्सव भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम है तथा इससे भेड़ाघाट को देश-विदेश में पहचान मिली है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत समृद्धि अय्यर की शास्त्रीय नृत्य में दुर्गा स्तुति से हुई। इसके बाद सागर के कलाकार दीपेश पांडेय ने बुंदेलखंड के प्रसिद्ध बधाई-नोरता लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। लोकगायक सुनील लोधी ने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डार दई’, नर्मदा मैया और अन्य भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय कर दिया। वहीं, डॉ. जसपिंदर नरूला ने ‘प्रभु जी दया करो, मन में आन बसो’ भजन से गायन की शुरुआत कर सांस्कृतिक संध्या का समापन किया।
आज अरुणिता कांजीलाल और ऋचा शर्मा की प्रस्तुति
महोत्सव के दूसरे दिन त्रिभंग कला अकादमी की कौतुकी उपाध्याय शास्त्रीय नृत्य और महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था ढोल-ताशा नृत्य प्रस्तुत करेगी। शाम के प्रमुख आकर्षण गायिका अरुणिता कांजीलाल और पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा होंगी, जिनकी प्रस्तुतियों का दर्शकों को इंतजार है।







