डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय गड़बड़ी, 60.60 लाख के भुगतान पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा,छह अधिकारी-कर्मचारी एफआईआर दर्ज

जबलपुर,यशभारत। डिंडौरी जिले के स्वास्थ्य विभाग में शासकीय राशि के कथित गबन का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय डिंडौरी में पदस्थ रहे तत्कालीन सीएमएचओ, जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) सहित छह अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध 60.60 लाख रुपये की शासकीय राशि के अनियमित एवं दोहरे भुगतान के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। मामला वर्ष 2016 से 2025 के बीच का है।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, प्राप्त शिकायत की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर आईएफएमआईएस (IFMIS) पोर्टल पर एरियर की गलत गणना कर पात्रता से अधिक राशि के भुगतान दर्ज किए। आरोप है कि कार्यालयीन अभिलेखों का उचित परीक्षण किए बिना और वैधानिक आधार के अभाव में भुगतान की प्रविष्टियां की गईं। जांच में एरियर, भत्तों तथा अन्य भुगतानों में अनियमितताएं सामने आई हैं।
एरियर के नाम पर 49.89 लाख का भुगतान
जांच के मुताबिक, पूर्व में मैन्युअल रूप से भुगतान किए गए एरियर की राशि की प्रविष्टि आईएफएमआईएस पोर्टल पर नेगेटिव एंट्री के माध्यम से कर 49.89 लाख रुपये का कथित अवैध भुगतान किया गया। इसके अलावा, बिना वैधानिक आदेश के मद परिवर्तन कर नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) और गृह भाड़ा भत्ते के रूप में 5.89 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किए जाने का आरोप है। जुलाई 2024 में गुलाब प्रसाद साहू, सहायक ग्रेड-3 को भी बिना कार्यालयीन आदेश और आवश्यक दस्तावेजों के 4.78 लाख रुपये का भुगतान किया गया। उस समय गुलाब प्रसाद साहू स्वयं लेखा शाखा के प्रभारी थे। इसके अलावा, वेंडरों को दी जाने वाली राशि में भी दोहरे अथवा गलत भुगतान की बात जांच में सामने आई है।
इन छह के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन सीएमएचओ आर.के. मेहरा, रमेश सिंह मरावी, तत्कालीन डीएचओ बदे सिंह भलावी और भरत सिंह टेकाम सहित सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू तथा सुपरवाइजर प्रकाश परस्ते को आरोपी बनाया है।
जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पद का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय नियमों की अनदेखी की और शासकीय राशि का अधिक अथवा दोहरा भुगतान स्वीकृत किया। इससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंचने का आरोप है।
ईओडब्ल्यू जबलपुर ने अपराध क्रमांक 109/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) और 61(2) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया है।







