सिर्फ हाइराइज! सरकार के नए नियमों से बदलेगा औद्योगिक क्षेत्रों का स्वरूप

इंडस्ट्री एरिया में अब प्लॉट नहीं, सिर्फ हाइराइज! सरकार के नए नियमों से बदलेगा औद्योगिक क्षेत्रों का स्वरूप
भोपाल, यसभारत। मध्य प्रदेश में रियल एस्टेट और औद्योगिक भूखंडों के उपयोग को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है। इंडस्ट्रियल पॉलिसी एवं इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन विभाग की नई अधिसूचना के मुताबिक, अब प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में स्वतंत्र रेजिडेंशियल प्लॉट, रो-हाउस और प्लॉट आधारित रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के विकास पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, आवासीय भूखंडों के उप-विभाजन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
अब केवल हाइराइज और फ्लैट्स को मंजूरी
नई नीति के तहत अब इंडस्ट्रियल एरिया में केवल फ्लैट आधारित और हाइराइज रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स ही विकसित की जा सकेंगी। इनमें 1 और 2 बीएचके फ्लैट्स के साथ-साथ कामकाजी कर्मचारियों और नागरिकों के लिए छात्रावास तथा जरूरी सामाजिक सुविधाओं के निर्माण का प्रावधान रखा गया है।
पुराने प्रोजेक्ट्स को राहत, नियमों का पालन अनिवार्य
शासन स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था केवल भविष्य में आने वाले नए प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी। पहले से संचालित रेजिडेंशियल स्कीम्स और अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, भविष्य में बनने वाली हर परियोजना के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान मास्टर प्लान, विकास योजना, भवन निर्माण नियम, अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) और पर्यावरण संबंधी सभी मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। यह निर्देश नोटिफाइड रेजिडेंशियल लैंड के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन पर कर्मचारियों के लिए बनाई जाने वाली कैप्टिव रेजिडेंशियल सुविधाओं पर भी समान रूप से लागू होंगे।







