जामनगर बना वैश्विक ऊर्जा केंद्र, मुकेश अंबानी ने गढ़ा नए गुजरात का औद्योगिक भविष्य
रिफाइनिंग से लेकर हरित ऊर्जा तक रिलायंस का विस्तार, पिता धीरूभाई की विरासत को वैश्विक पहचान तक पहुंचाया

जामनगर बना वैश्विक ऊर्जा केंद्र, मुकेश अंबानी ने गढ़ा नए गुजरात का औद्योगिक भविष्य
रिफाइनिंग से लेकर हरित ऊर्जा तक रिलायंस का विस्तार, पिता धीरूभाई की विरासत को वैश्विक पहचान तक पहुंचाया
जामनगर। गुजरात के जामनगर ने भारत की औद्योगिक क्षमता को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के नेतृत्व में यह क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े एकल-स्थल तेल रिफाइनिंग परिसरों का केंद्र बना। अब इसी धरती पर हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश के जरिए भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम हो रहा है। यही वजह है कि मुकेश अंबानी को नए युग के गुजरात का शिल्पकार कहा जा रहा है।
पिता की विरासत को दिया नया विस्तार
धीरूभाई अंबानी ने 1977 में रिलायंस के सार्वजनिक निर्गम के जरिए आम भारतीयों को कंपनी में हिस्सेदारी का अवसर दिया था। उन्होंने मध्यमवर्गीय परिवारों को उद्योग की प्रगति में भागीदार बनाया। वर्ष 2002 में उनके निधन के बाद मुकेश अंबानी ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए कारोबार का व्यापक विस्तार किया। उनका लक्ष्य केवल स्थापित व्यवसायों को संभालना नहीं, बल्कि नए क्षेत्रों में निवेश कर बड़े बदलाव लाना था।
जामनगर से दुनिया तक पहुंची पहचान
जामनगर की रिफाइनिंग परियोजना ने गुजरात को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। इस औद्योगिक विकास से रोजगार, तकनीकी कौशल और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिला। आपूर्तिकर्ताओं तथा सेवा क्षेत्र से जुड़े कारोबारों के लिए भी नए अवसर बने। अब धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स के माध्यम से रिलायंस सौर ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
निवेशकों से कायम रहा भरोसा
रिलायंस की विकास यात्रा में आम निवेशकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। वर्ष 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम का सार्वजनिक निर्गम आया, जबकि 2009 में इसका रिलायंस इंडस्ट्रीज में विलय हो गया। इस तरह धीरूभाई द्वारा शुरू की गई निवेशकों के साथ साझेदारी की परंपरा आगे बढ़ी।कपड़ों के धागे से लेकर खुदरा कारोबार, डिजिटल सेवाओं और दूरसंचार तक रिलायंस ने लोगों के दैनिक जीवन में अपनी जगह बनाई है। जामनगर इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां औद्योगिक क्षमता के साथ नई ऊर्जा का भविष्य भी आकार ले रहा है। गुजरात की धरती, यहां के श्रमिकों और निवेशकों की भागीदारी ने इस यात्रा को व्यापक आधार दिया है।







