भोपाल

अरेरा कॉलोनी में घरों के बीच बढ़ता कारोबार, रहवासियों ने उठाए सवाल

अरेरा कॉलोनी में घरों के बीच बढ़ता कारोबार, रहवासियों ने उठाए सवाल

– हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की मांग, अवैध व्यावसायिक निर्माण सील नहीं हुए तो अवमानना याचिका दायर करेगी समिति

यश भारत, भोपाल। अरेरा कॉलोनी में आवासीय भूखंडों पर बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर रहवासियों की चिंता बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जिन कॉलोनियों को शांत और व्यवस्थित आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया था, वहां व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्र की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है। इसी मुद्दे पर संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने नगर निगम आयुक्त को पत्र सौंपकर नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माणों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
समिति ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के प्रकरण डब्लूपी -20830-2022 में 8 सितंबर 2026 को पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित संपत्तियों के भू-उपयोग और अनुमतियों की जांच कर चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। समिति ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अरेरा कॉलोनी में प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। रहवासियों ने सवाल उठाया है कि जब न्यायालय के आदेश में समयसीमा तय की गई है, तो संबंधित विभाग नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं।
चार साल में 20 से बढ़कर 80 मामले
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का दावा है कि वर्ष 2022 में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों के करीब 20 मामले थे, जो अब बढ़कर 80 से अधिक हो गए हैं। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में सील की गई कुछ संपत्तियों पर दोबारा व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें मिल रही हैं।
रहवासियों की चिंता यह है कि आवासीय इलाकों में कारोबार बढ़ने से यातायात, पार्किंग, शोर और आसपास रहने वाले परिवारों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। ऐसे में उनका मानना है कि केवल शिकायतों के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
फ्रीहोल्ड संपत्ति का मतलब व्यावसायिक छूट नहीं
समिति के मुताबिक, संबंधित संपत्तियों के स्वीकृत नक्शों, विक्रय विलेख और अन्य दस्तावेजों में आवासीय उपयोग दर्ज है। समिति का कहना है कि किसी भूखंड को फ्रीहोल्ड कराने मात्र से वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं मिल जाती। इसके लिए संबंधित नियमों के तहत जरूरी मंजूरी होना आवश्यक है। समिति ने प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 के आधार पर मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने की संभावनाओं पर भी आपत्ति जताई है। उसका दावा है कि संबंधित क्षेत्र को प्रस्तावित योजना में RG-3 श्रेणी के अंतर्गत आवासीय रखा गया है। इसलिए भू-उपयोग और भवन अनुमतियों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट जाएगी समिति
समिति ने सर्वोच्च न्यायालय के राजेंद्र कुमार बड़जात्या बनाम उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद मामले में 2024 में दिए गए निर्देशों का भी हवाला दिया है। उसने मांग की है कि अरेरा कॉलोनी सहित अन्य आवासीय क्षेत्रों में संबंधित प्रतिष्ठानों के दस्तावेजों की जांच हो और नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग सहित दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button