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धान पर ’22 क्विंटल’ का पहरा, किसानो में आक्रोश गहरा : ​चुनावी वादे की याद: 3100 का भाव और 40 क्विंटल सीमा की गुहार, खोला मोर्चा

यशभारत डिंडोरी । धान पंजीयन की सीमा को लेकर डिंडौरी जिले के किसानों में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। सेवा संकल्प शिविर में बड़ी संख्या में किसानों के साथ पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने कृषि विभाग को आवेदन सौंपकर धान के पंजीयन की सीमा 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर कम से कम 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही किसानों ने 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए धान खरीदी के 3100 रुपए प्रति क्विंटल के वादे को लागू करने की मांग भी उठाई।

आवेदन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मध्यप्रदेश के कृषि कल्याण मंत्री के नाम संबोधित किया गया है। आवेदन में कहा गया है कि डिंडौरी जिले में धान किसानों की प्रमुख फसलों में शामिल है और हजारों परिवारों की आय एवं आजीविका इससे जुड़ी हुई है। इसके बावजूद पंजीयन की सीमा कम रखे जाने से किसान अपनी वास्तविक उपज का पूरा लाभ समर्थन मूल्य पर नहीं उठा पा रहे हैं।

‘जब पड़ोसी जिलों में 40 से 45 क्विंटल, तो डिंडौरी में 22 क्यों?’

किसानों और कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि आसपास के जिलों में किसानों की धान उपज के अनुरूप अधिक मात्रा में पंजीयन किया जा रहा है, तो डिंडौरी के किसानों के लिए महज 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की सीमा क्यों निर्धारित की गई है?

उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, मजदूरी, जुताई, कटाई और परिवहन पर किसान को भारी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में यदि खेत में वास्तविक उत्पादन 22 क्विंटल से अधिक है, लेकिन सरकारी खरीदी के लिए पंजीयन की सीमा ही 22 क्विंटल निर्धारित कर दी जाए, तो अतिरिक्त उपज को किसान को खुले बाजार में कम कीमत पर बेचने की मजबूरी पैदा हो सकती है।

आवेदन में इसे किसानों के साथ क्षेत्रीय असमानता का विषय बताते हुए पंजीयन सीमा की पुनः समीक्षा करने की मांग की गई है।

धान यहां सिर्फ फसल नहीं, हजारों परिवारों का आधार

किसानों का कहना है कि डिंडौरी आदिवासी बहुल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाला जिला है, जहां खेती सीधे तौर पर बड़ी आबादी की आजीविका से जुड़ी है। ऐसे जिले में धान पंजीयन की सीमा वास्तविक उत्पादन के अनुरूप नहीं होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

किसानों ने सरकार से मांग की कि जिले की भौगोलिक परिस्थितियों, कृषि क्षेत्र और वास्तविक उत्पादन को देखते हुए पंजीयन की सीमा तत्काल बढ़ाई जाए, ताकि किसान अपनी पूरी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकें।

सेवा संकल्प शिविर में धान के मूल्य को लेकर भी सवाल उठाया गया। आवेदन में 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की मांग की गई है। यहां एक तथ्यात्मक स्पष्टता जरूरी है: 2023 मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र में धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने का वादा प्रमुख चुनावी घोषणा के रूप में दर्ज था।

कांग्रेस नेताओं ने इसी चुनावी वादे का हवाला देते हुए सरकार से किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ देने की मांग आवेदन के माध्यम से रखी है।

किसानों की मांग—सीमा बढ़े, वादा पूरा हो

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसान अपनी मेहनत और लागत के अनुरूप उचित मूल्य चाहता है। धान पंजीयन की सीमा कम होने से यदि उसकी पूरी उपज सरकारी खरीदी में शामिल नहीं होती है, तो समर्थन मूल्य की व्यवस्था का लाभ भी अधूरा रह जाता है। इसलिए सरकार को केवल पंजीयन की औपचारिकता पूरी करने के बजाय वास्तविक उत्पादन के अनुरूप खरीदी की सीमा तय करनी चाहिए।

आवेदन सौंपने के दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य लोकेश पटेरिया, पूर्व प्रदेश प्रतिनिधि एवं जनपद उपाध्यक्ष राधेश्याम कुशराम, मिढली सरपंच भुखऊ राम, बिलाईखार सरपंच राजेंद्र धुर्वे, कृपाल दास, रामचरन, नितेश मार्को, सेवक धुर्वे, हरि सिंह, सुखीराम, ज्ञान सिंह, जगत सिंह, उमेश कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

किसानों की मुख्य मांगें:

धान पंजीयन की सीमा 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की जाए।

वास्तविक उत्पादन के आधार पर सरकारी खरीदी की व्यवस्था हो।

2023 के चुनावी वादे के अनुरूप 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की मांग पर निर्णय लिया जाए।

डिंडौरी जिले के किसानों के साथ पंजीयन सीमा को लेकर किसी प्रकार का भेदभाव न हो।

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