कटनीमध्य प्रदेश

आस्था के पंडाल, खतरे के तार

नवरात्रि में करंट-जाम की दोहरी चुनौती

आस्था के पंडाल, खतरे के तार

नवरात्रि में करंट-जाम की दोहरी चुनौतीScreenshot 20261004 122352 Samsung Notes

IMG 20261004 WA0038 IMG 20261004 WA0040 IMG 20261004 WA0043

बड़े-बड़े गड्ढे, बंद स्ट्रीट लाइट और अतिक्रमण भी चुनौती

गणेश उत्सव की अव्यवस्था से सबक लेकर हादसे से पहले कलेक्टर-एसपी कराएं सुरक्षा जांच

कटनी, यशभारत। नवरात्रि की आहट के साथ शहर में पंडाल सजने लगे हैं। सड़क किनारे बांस-बल्ली खड़ी हो रही है, ऊपर झालरों के लिए तार खिंचने लगे हैं और बाजारों में भीड़ बढ़ने लगी है। यही वह वक्त है जब प्रशासन को उत्सव की चमक से पहले उसकी सुरक्षा की हकीकत देखनी चाहिए। क्योंकि इस बार खतरा सिर्फ जाम का नहीं है—सड़क पर पंडाल, ऊपर बिजली के तार और नीचे गड्ढे मिलकर करंट, हादसे और अव्यवस्था का खतरनाक समीकरण बना रहे हैं।
शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सड़कें पहले से ही बड़े-बड़े गड्ढों से छलनी हैं। कहीं डामर उखड़ा है तो कहीं गड्ढों से बचने के लिए वाहन अचानक दिशा बदलते हैं। नवरात्रि में इन्हीं सड़कों पर पैदल श्रद्धालुओं, दोपहिया वाहनों और चारपहिया वाहनों का दबाव बढ़ेगा। यदि पंडाल और मंच सड़क की उपलब्ध चौड़ाई और कम करते हैं तो सामान्य यातायात भी जाम में फंस सकता है। ऐसे में गड्ढों की मरम्मत को केवल सड़क सुधार का काम मानना पर्याप्त नहीं होगा, यह सीधे त्योहारी ट्रैफिक और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

सबसे ज्वलंत सवाल—पंडालों में करंट से सुरक्षा कौन देखेगा?

पंडालों में सजावट के लिए अस्थायी वायरिंग होगी। झालरें, एक्सटेंशन बोर्ड, कनेक्शन और तार भीड़ के बीच चलेंगे। यदि कहीं तार क्षतिग्रस्त है, जोड़ खुला है, अर्थिंग कमजोर है या तार पानी के संपर्क में आता है तो उत्सव का माहौल एक पल में हादसे में बदल सकता है। करंट का खतरा ऐसा है जिसमें गलती की गुंजाइश नहीं हो सकती।

इसलिए पंडाल खड़े होने के बाद औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि पंडाल शुरू होने से पहले विद्युत सुरक्षा जांच जरूरी है। कलेक्टर-एसपी को संयुक्त टीम बनाकर सभी प्रमुख पंडालों की सूची तैयार करानी चाहिए। विद्युत विभाग वायरिंग, अर्थिंग, कनेक्शन और तारों की ऊंचाई जांचे तथा नगर निगम और पुलिस सड़क पर पंडाल की सीमा, आवागमन और आपात रास्ते की स्थिति देखें। जहां कमी मिले, वहां सुधार के बाद ही अनुमति दी जाए।

गणेश उत्सव की तस्वीर को चेतावनी मानना होगा

गणेश उत्सव में आजाद चौक पर सड़क घिरने से यातायात प्रभावित होने की स्थिति सामने आ चुकी है। यह केवल बीते आयोजन की बात नहीं, बल्कि नवरात्रि के लिए पहले से दिखाई दे रही चुनौती है। यदि पंडाल के साथ मंच, स्वागत द्वार, सजावट और वाहनों की पार्किंग भी सड़क तक पहुंची तो प्रमुख मार्गों पर जाम का दबाव कई गुना बढ़ सकता है।

आस्था के नाम पर सड़क की पूरी चौड़ाई घेर देना व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता। समितियों को पहले ही स्पष्ट कर देना चाहिए कि पंडाल लगेगा, लेकिन एंबुलेंस, दमकल और पुलिस वाहन के लिए रास्ता नहीं रुकेगा। मौके पर जाकर सीमा तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए, शिकायत का इंतजार करना नहीं।

बंद स्ट्रीट लाइटें भी बनेंगी जोखिम

रात के आयोजनों के बीच कई इलाकों में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें अलग समस्या खड़ी कर रही हैं। जहां सड़क पहले ही गड्ढों से भरी है, वहां अंधेरा दोपहिया वाहन चालकों और पैदल श्रद्धालुओं के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। पंडालों की रोशनी के बीच मुख्य सड़क या संपर्क मार्ग अंधेरे में रहे तो भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों प्रभावित होंगे। इसलिए नवरात्रि से पहले खराब सड़कों की मरम्मत और बंद स्ट्रीट लाइटों की बहाली को भी सुरक्षा योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

शांति समिति में सिर्फ बैठक नहीं, मौके की जिम्मेदारी तय हो

शांति समिति की बैठक केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। इसमें जनप्रतिनिधियों, पुलिस, नगर निगम, बिजली विभाग और आयोजन समितियों के साथ शहर के संवेदनशील मार्गों पर ठोस निर्णय लिए जाएं। इसके बाद अधिकारियों की टीम प्रमुख पंडालों और मार्गों का संयुक्त भ्रमण करे। जहां करंट का जोखिम है, जहां सड़क संकरी हो रही है, जहां गड्ढे हैं, जहां रोशनी बंद है और जहां जाम की आशंका है—इन सभी स्थानों की सूची पहले तैयार हो।
डीजे, ध्वनि सीमा और आपत्तिजनक गीतों को लेकर भी पहले से स्पष्ट नियम और जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि आयोजन के दौरान कार्रवाई के लिए हड़बड़ी न करनी पड़े।

नवरात्रि में भीड़ अचानक नहीं बढ़ती, उसकी तैयारी कई दिन पहले सड़क पर दिखाई देने लगती है। इसलिए प्रशासन के पास अभी मौका है। पंडालों की जांच, बिजली सुरक्षा, सड़क मरम्मत, गड्ढों की भराई, स्ट्रीट लाइटों की बहाली और ट्रैफिक प्लान अभी बनाया जा सकता है।

इस बार असली परीक्षा नवरात्रि के दिन नहीं, उससे पहले प्रशासन की तैयारी की है। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि हादसा होने पर जिम्मेदार कौन होगा; सवाल यह होना चाहिए कि हादसे की गुंजाइश रहते हुए उसे रोकने के लिए जिम्मेदारी किसने निभाई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button