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यशभारत ब्रेकिंग : बरगी बांध के 13 गेट खुले, नर्मदा घाटों पर बढ़ा जलस्तर

जबलपुर, यश भारत। बरगी बांध के जलग्रहण क्षेत्र में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद बांध में पानी की आवक लगातार बढ़ रही है। बढ़ती आवक को देखते हुए बांध की सुरक्षा और जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए जल निकासी बढ़ा दी गई है। शनिवार सुबह 11 बजे से बरगी बांध के सात और जलद्वार खोले गए। इसके साथ ही बांध के कुल 13 गेट खुले हैं और इनसे औसतन 1.83 मीटर की ऊंचाई से करीब 2714 क्यूमेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है।

बांध प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में बांध में पानी की आवक करीब 941 क्यूमेक बनी हुई है। इससे पहले शुक्रवार शाम 6 बजे छह गेट खोले गए थे। इसके बाद जलग्रहण क्षेत्र में हुई बारिश और पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए शनिवार को सात और गेट खोलकर जल निकासी बढ़ाई गई। फिलहाल बारिश की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन बांध में पानी की आवक पर लगातार नजर रखी जा रही है।

घाटों पर बढ़ेगा नर्मदा का जलस्तर

बरगी बांध से बड़ी मात्रा में पानी नर्मदा नदी में छोड़े जाने के कारण नदी के जलस्तर में वृद्धि होगी। अनुमान के अनुसार नर्मदा के विभिन्न घाटों पर वर्तमान जलस्तर की तुलना में करीब 6 से 8 फीट तक पानी बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों और नदी के किनारे स्थित घाटों पर पानी का दबाव बढ़ने की संभावना है।

आवक के अनुसार घट-बढ़ सकती है जल निकासी

बांध प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जलग्रहण क्षेत्र से बांध में आने वाले पानी की मात्रा के अनुसार जल निकासी को कभी भी घटाया या बढ़ाया जा सकता है। यदि पानी की आवक बढ़ती है तो बांध से अधिक पानी छोड़ा जा सकता है, वहीं आवक कम होने पर जल निकासी भी कम की जा सकती है। बांध के जलस्तर और पानी की आवक की लगातार निगरानी की जा रही है।

लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील

बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए आम लोगों से घाटों और नदी के तटीय क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। विशेष रूप से निचले घाटों और नदी के किनारे जाने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, ताकि बढ़ते जलस्तर के कारण किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।

बांध प्रबंधन ने लोगों से नदी में उतरने और जलस्तर बढ़ने वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचने का आग्रह किया है। पानी की स्थिति में होने वाले बदलाव के अनुसार आगे भी गेटों की स्थिति और जल निकासी में बदलाव किया जा सकता है।

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