वाह रे! विकाश : 239 जर्जर आंगनबाड़ी भवन, बच्चों व माताओं की जान को खतरा

मंडला। सरकार आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने और उनके मानसिक व बौद्धिक विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। महिला एवं बाल विकास परियोजना के अधीन संचालित कई आंगनबाड़ी केंद्र क्षतिग्रस्त व जर्जर भवनों में चलाए जा रहे हैं। ऐसे में इन केंद्रों में बच्चों के साथ.साथ नवजात शिशुओं व धात्री महिलाओं के लिए भी हादसे का अंदेशा बना हुआ है। इन केंद्रों के भवन बेहद जर्जर हालत में हैं, जहां बच्चों को बैठाया जाता है। इसी स्थान पर नवजात शिशुओं और धात्री महिलाओं का टीकाकरण भी किया जाता है और अन्य गतिविधियो का आयोजन भी होता है। विभाग को इन भवनों की दयनीय स्थिति की पूरी जानकारी है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाको में विभाग की ओर से न तो किराए के भवन की व्यवस्था की गई है और न ही कोई अन्य सुरक्षित भवन उपलब्ध कराया गया है। इस लापरवाही से बच्चों और माताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुरक्षित भवनों के अभाव में सरकारी प्रयासों पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
जर्जर व जीर्णशीर्ण आंगनबाड़ी केन्द्र होने के चलते कार्यकत्र्ताओ को हर साल केन्द्र बदलना पड रहा है। यहां घुघरी के केन्द्र का भवन पिछले सालो से जर्जर हो गया है। भवन में ही सूचना लिख दी गई है कि भवन के नजदीक ना जाए। इसके चलते केन्द्र पहले पंचायत भवन में संचालित होता रहा है अब किराए के कमरे में है। बिछिया के खटोला गांव में आंगनबाड़ी भवन की बाऊड्रीबॉल में पेड गिर गया। इस वजह से काफी नुकसान हुआ है। यहा भी अव्यवस्थाओ के बीच नौनिहालो को बैठाना पड़ रहा है।
अधिकांश केंद्रों में बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल, बिजली और स्वच्दता परिसर जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। अपने भवन न होने के कारण कई केंद्र किराए के छोटे कमरों या अन्य परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहाँ बच्चों के बैठने की उचित जगह नहीं मिल पाती। प्रशासनिक निगरानी की कमी के चलते कोई सुधार कार्य नहीं हो रहे है। इसके चलते बच्चो के स्वास्थ्य शिक्षा और सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
महिला एवं बाल विकास के द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रो में बच्चो को समुचित व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण इलाको में नवीन भवनो का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है लेकिन जर्जर और भवनविहीन केन्द्रो की संख्या से ये कही कम है। जिलेभर में 83 केन्द्र भवनो का निर्माण कार्य जारी है इसमें 67 भवनो का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं किया गया है। भवन निर्माण की एजेंसी ग्राम पंचायत व ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग को बनाया गया लेकिन प्रशासन के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बच्चों के पोषण और शिक्षा के केन्द्र
आंगनबाड़ी केंद्र माताओं और बच्चों की देखभाल का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है,सरकार ने बच्चों में भूख और कुपोषण जैसी समस्याओं के समाधान के लिए यह योजना साल 1975 में शुरू की थी। गांव ें में लगभग 400 से 800 की जनसंख्या पर एक आंगनबाड़ी केंद्र होता है। यह केंद्र शून्य से छह साल तक के शिशुओं व बालकों के लिए एक आंगन के समान है, जहां वे खेलकूद और सीखने की गतिविधियों में संलग्न होकर भविष्य के लिए तैयार होते हैं। यहां इन बालकों को शिक्षा, पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य संबंधी टीकाकरण जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। आंगनबाड़ी केंद्र का प्रमुख उद्देश्य यह है कि छह साल तक के सभी बच्चों को हर प्रकार की सुविधा का लाभ मिले और वे कुपोषण का शिकार न हों।
फैक्ट फाइल
कुल केन्द्र 2313
विभागीय भवन 1516
अन्य भवन 308
किराये के भवन 489
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