हजारों मरीजों का बोझ, पुराने नर्सिंग स्टाफ के भरोसे मेडिकल कॉलेज
नर्सिंग स्टाफ बढ़ाने पर चुप्पी

जबलपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज परिसर में सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, स्टेट कैंसर अस्पताल और एसईपीएम (SEPM) में बेड क्षमता बढ़ाकर 2,266 कर दी गई है। इसी आधार पर मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एमबीबीएस सीटों में भी इजाफा कर दिया गया, लेकिन जिस नर्सिंग स्टाफ के भरोसे इन हजारों मरीजों की देखभाल होती है, उसके पद आज भी पुराने ढर्रे पर ही अटके हुए हैं।
हालात यह हैं कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, नए वार्ड शुरू हो रहे हैं और अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं, लेकिन नर्सिंग अधिकारियों की संख्या में नियमानुसार बढ़ोतरी नहीं हुई। नतीजतन, एक-एक नर्सिंग अधिकारी पर पहले से कहीं अधिक मरीजों की जिम्मेदारी आ गई है। लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण मरीजों की निगरानी, समय पर दवा, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और समग्र नर्सिंग सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने लगी है।
बेड बढ़े, लेकिन स्टाफ नहीं
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज परिसर के चारों अस्पतालों में पिछले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बेड बढ़ाए गए। इससे मरीजों को भर्ती करने की क्षमता तो बढ़ी, लेकिन मानव संसाधन का विस्तार नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल शिक्षा के लिए एमबीबीएस सीटों में वृद्धि को मंजूरी दे दी, जबकि उन्हीं अस्पतालों में सेवाएं देने वाले नर्सिंग अधिकारियों के नए पद स्वीकृत नहीं किए गए।
नियमों की अनदेखी के आरोप
अस्पताल प्रबंधन से जुड़े जानकारों का कहना है कि निर्धारित मानकों के अनुसार बेड क्षमता बढ़ने पर नर्सिंग अधिकारियों के पद भी अनुपात में बढ़ाए जाने चाहिए। ऐसा नहीं होने से न केवल कर्मचारियों पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण उपचार भी प्रभावित हो सकता है।
दोगुना काम, वही पुराना स्टाफ
नर्सिंग अधिकारियों को कई वार्डों की जिम्मेदारी एक साथ संभालनी पड़ रही है। छुट्टियों और रिक्त पदों के कारण कई बार कर्मचारियों को अतिरिक्त शिफ्ट करनी पड़ती है। लगातार बढ़ते दबाव से कार्यस्थल पर तनाव की स्थिति बन रही है, जिसका असर मरीजों की देखभाल पर भी दिखाई देने लगा है।
अनिश्चित कालीन हडताल की चेतावनी
नर्सिंग संवर्ग ने बताया कि शासन स्तर पर कई बार पत्राचार किए जाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। नर्सिंग एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा दुबे ने बताया कि 4 अगस्त को दो घंटे का पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। यदि इसके बाद भी मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो नर्सिंग संवर्ग अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होगा।








