रेलवे अस्पताल की कैंटीन का ताला बंद कर भूखे-प्यासे मरीजों को भूला प्रशासन, 1.5 किमी पैदल चलने को मजबूर परिजन

रेलवे अस्पताल की कैंटीन का ताला बंद कर भूखे-प्यासे मरीजों को भूला प्रशासन, 1.5 किमी पैदल चलने को मजबूर परिजन
दूर-दराज से आ रहे 300 से ज्यादा मरीज और तीमारदार परेशान
भोपाल, यशभारत। भोपाल के रेलवे अस्पताल में पिछले एक महीने से कैंटीन बंद पड़े होने के कारण व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी से उतर गई हैं। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा यहां हर दिन इलाज कराने आ रहे 300 से अधिक मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। परिसर में चाय-नाश्ते से लेकर भोजन तक की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोगों को कड़ाके की धूप और गर्मी में 1 से 1.5 किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ रहा है।
इलाज के बीच भोजन की मशक्कत
दूर-दराज के इलाकों से आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को सुबह से दोपहर तक ओपीडी, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे और डॉक्टर के परामर्श के लिए अस्पताल में इंतजार करना पड़ता है। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने के कारण मरीजों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। कई बार परिजनों को लाइन छोड़कर बाहर खाना या पानी लेने जाना पड़ता है, जिससे उनका नंबर निकल जाता है और इलाज प्रक्रिया में बेवजह देरी होती है।
वार्ड के तीमारदारों की बढ़ी चिंता
अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों की देखरेख कर रहे परिजनों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। गंभीर मरीजों को अकेला छोड़कर परिसर से बाहर जाना जोखिम भरा साबित हो रहा है। इसके बावजूद मजबूरी में दिन में कई बार उन्हें चाय, पानी और खाने का सामान लेने बाहर जाना पड़ता है।
नया टेंडर अटका, वैकल्पिक स्टॉल भी नहीं
सूत्रों के अनुसार पुराना ठेका खत्म होने के बाद कैंटीन बंद कर दी गई, लेकिन समय रहते नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले एक महीने में प्रशासन ने अस्पताल परिसर में कोई अस्थायी स्टॉल या पीने के पानी का वैकल्पिक इंतजाम तक नहीं किया।
प्रबंधकीय पक्ष
मामले में अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि कैंटीन शुरू कराने के लिए नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और बहुत जल्द खान-पान की व्यवस्था पुनः सुचारू कर दी जाएगी।







