विश्व बाघ दिवस यश भारत विशेष:’कॉरिडोर’ बना मौत का जाल! 5 सालों में खामोश हुईं पेंच की 31 ‘दहाड़ें’ : संरक्षण के साथ सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती…. देखें पूरा वीडियो

सिवनी यश भारत । विश्व बाघ दिवस (29 जुलाई) के अवसर पर एक ओर पेंच टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में अपनी पहचान बनाए हुए है, तो दूसरी ओर पिछले पांच वर्षों में बाघों की लगातार हुई मौतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच पेंच परिक्षेत्र में कुल 31 बाघों की मौत दर्ज की गई। इनमें 15 बाघों की मौत पेंच टाइगर रिजर्व की सीमा के भीतर, जबकि 16 बाघों की मौत रिजर्व से लगे बाहरी वन क्षेत्रों में हुई है।

वन अधिकारियों के अनुसार अधिकांश मौतें प्राकृतिक कारणों, आपसी संघर्ष, बीमारी तथा बढ़ती उम्र के कारण हुई हैं। हालांकि कुछ मामलों में करंट, अवैध शिकार और अन्य मानवजनित कारण भी सामने आए हैं। वर्ष 2024 में करंट लगने से एक बाघ की मौत हुई थी, जबकि पूर्व वर्षों में फंदा और जहर देकर शिकार किए जाने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2012 में शिकारियों ने एक बाघ की खाल और हड्डियां निकाल ली थीं, वहीं वर्ष 2016 में एक बाघिन और उसके दो शावकों को जहर देकर मारने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेंच के बाघ अब अपने पारंपरिक आवास से निकलकर अन्य वन क्षेत्रों की ओर विचरण कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षित वन्यजीव कॉरिडोर की कमी, मानव-वन्यजीव संघर्ष और अवैध शिकार की आशंका बढ़ जाती है। पेंच-कान्हा कॉरिडोर से जुड़े कई गांवों में निगरानी और जनजागरूकता की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।
वन विभाग ने बाघ संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए गांव-गांव में ‘बाघ चौपाल’, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, मुखबिर तंत्र को मजबूत करने तथा टाइगर स्ट्राइक फोर्स के माध्यम से निगरानी बढ़ाई है। विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार पिछले चार वर्षों में बाघ सहित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण पर लगभग 19.15 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वन्यजीव कॉरिडोर सुरक्षित किए जाएं, आधुनिक तकनीक से निगरानी बढ़ाई जाए और अवैध शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए, तो भविष्य में बाघों की मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। विश्व बाघ दिवस पर पेंच की यह तस्वीर संरक्षण की सफलता के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता का भी संदेश देती है।
(आंकड़े- एनटीसीए के अनुसार)
वर्ष | मौत
2021 | 07
2022 | 05
2023 | 04
2024 | 04
2025 | 09
2026 | 04
कुल | 31
डीएफओ दक्षिण सामान्य वनमंडल गौरव मिश्र का कहना है कि बाघ हमारे जंगलों की शान और जैव विविधता की पहचान हैं। उनका संरक्षण कैवल वन विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। लोगों को जंगलों और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनकर अवैध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए।
डीएफओ, उत्तर सामान्य वनमंडल महेन्द्र सिंह उइके का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम अपने जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। बाघों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन, जल स्रोतों और जैव विविधता की सुरक्षा से जुड़ा है।
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल का कहना है कि पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा गांवों में कई जाग्ररुकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। गतिविधियों के माध्यम से लोगों को यह समझाया जा रहा है कि बाघ दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त हैं। अधिकतर मामले में यह देखने में आया है बाघ आबादी वाले क्षेत्रों में नहीं पहुंचे हैं। लोग तेंदूपत्ता तोड़ने, महुआ बीनने, पशु चराने सहित अन्य वजह से जंगल में जाते हैं। बाघ कभी मानव पर हमला नहीं करता। वह तभी हिंसक होता है जब उसे लगता है कि जान का खतरा है।






