कटनी

मर्डर से जुड़ रहे जमीन खरीदी के तार, सीएसपी पर आंच, फिर विवादों में आया कटनी सीएसपी का पद, आईजी ने जबलपुर के एडीशनल एसपी को सौंपा जांच का जिम्मा

कटनी, यशभारत। कटनी में नगर पुलिस अधीक्षक का पद एक बार फिर विवादों में है। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ गंभीर शिकायतों के बाद खबरें राजधानी की सुर्खियां बन रही है। पिछले दिनों एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी से अवैध वसूली की शिकायतों के बाद अब एक नया मामला सामने आया है, जिसने न केवल सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ा दी है, बल्कि पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। यह मामला कुठला थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कन्हवारा में 31 मार्च को हुए झब्बू कोल हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। इस मामले में पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हत्या जैसे अपराध में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ निर्धारित 90 दिनों में न्यायालय में चालान प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिसके चलते आरोपी को डिफॉल्ट बेल (वैधानिक जमानत) का लाभ मिल गया। इस मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब जेल में बंद आरोपी रमेश लोधी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दायर कर पुलिस अधिकारियों पर हत्या के मामले से बचाने के नाम पर उसकी कन्हवारा स्थित जमीन कम कीमत पर विक्रय कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए। परिवाद में दावा किया गया है कि जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपए था, जबकि 18 लाख रुपये में उसका विक्रय कराया गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया और बाद में उसे भी हत्या के मामले में आरोपी बना दिया गया। मामला सामने आने के बाद आईजी प्रमोद वर्मा के निर्देश पर अब दो स्तरों पर जांच कराई जा रही है। हत्या के प्रकरण में 90 दिन के भीतर चालान पेश नहीं किए जाने तो वहीं न्यायालय में लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है।
यह है मामला
कुठला थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कन्हवारा में 31 मार्च को 28 वर्षीय झब्बू कोल का अधजला शव खेत के बाहर मिलने से सनसनी फैल गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक झब्बू कोल रमेश लोधी के खेत में मजदूरी करता था। खेत की रखवाली के बदले अनाज देने को लेकर विवाद हो गया था, जिसके बाद उसके साथ मारपीट हुई। पुलिस के अनुसार आकाश लोधी और अन्य आरोपियों ने डंडे एवं ईंट से हमला कर उसकी हत्या कर दी तथा साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को खेत के बाहर ले जाकर आग लगा दी। इसी मामले में बाद में आकाश लोधी, सतीश पटेल और रमेश लोधी को आरोपी बनाया गया था।
अदालत में दायर किया गया परिवाद
कन्हवारा में हुए छग्गू कोल हत्याकांड के आरोपी रमेश लोधी, उसके पुत्र आकाश लोधी और दामाद सतीश लोधी ने अपने अधिवक्ता अवनीश तिवारी के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन (तिवारी) की अदालत में परिवाद दायर किया है, जिसमे आरोप लगाया गया है कि हत्या के केस से बचाने और रिहा करने के एवज में 82.86 लाख रुपये की सरकारी गाइडलाइन (लगभग 1.07 करोड़ बाजार मूल्य) वाली 2.15 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री कम कीमत पर एक कांग्रेस नेता के नाम करा दी गई। इस मामले में अदालत ने संबंधित थाने से जांच प्रतिवेदन मांगा है, जिसकी अगली सुनवाई 9 सितंबर को निर्धारित की गई है।
जमीन की गाइडलाइन 85 लाख
परिवाद और प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार ग्राम कन्हवारा स्थित खसरा नंबर 2618/1 रकबा 2.15 हेक्टेयर की वैल्यू शासकीय गाइडलाइन के हिसाब से 82.86 लाख रुपये होती है। जमीन की रजिस्ट्री 15 अप्रैल को महज हुई। इस सौदे में विक्रेता रमेश लोधी को सिर्फ 15 लाख रुपये मिलने की बात कही गई है। रमेश लोधी का कहना है कि उसे न तो बकाया पैसा मिला और न ही उसका बेटा छूटा। तब उसने 18 मई को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की।
राष्ट्रपति, डीजीपी और हाईकोर्ट रजिस्ट्रार तक शिकायत
अधिवक्ता अवनीश तिवारी ने राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, डीजीपी और उच्च न्यायालय को ई-मेल भेजकर उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कमेटी गठित करने, कॉल डिटेल खंगालने, संबंधित लोगों के नार्को, पॉलीग्राफ टेस्ट कराने तथा विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है।

 

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