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खुद का आंगन साफ नहीं और शहर चमकाने का दावा,नगर निगम जोन दफ्तर के पीछे ही बदहाली का अड्डा

 जलभराव और कचरे का अंबार; शाम ढलते ही सजती है शराबियों की महफिल

जबलपुर, यश भारत। शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने का दावा करने वाले नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उसके अपने ही जोन कार्यालय का परिसर सवाल खड़े कर रहा है। दमोह नाका स्थित नगर निगम जोन कार्यालय के पीछे, पुराने क्षेत्रीय बस स्टैंड और शांति नगर रोड से लगा सरकारी परिसर इन दिनों जलभराव, गंदगी, कचरे के ढेर और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। विडंबना यह है कि जहां से शहर की सफाई व्यवस्था की निगरानी की जाती है, वहीं के हालात बदहाल हैं। इससे स्थानीय नागरिकों में निगम की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।

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बारिश के बाद जोन कार्यालय के पीछे और पुराने बस स्टैंड के निचले हिस्सों में पानी कई-कई दिनों तक जमा रहता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यह पानी सड़ने लगता है, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमा पानी मच्छरों के पनपने का बड़ा केंद्र बन चुका है और इससे डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नजर नहीं आ रहा।

स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब नगर निगम कार्यालय के पीछे का खाली परिसर अनौपचारिक कचरा डंपिंग स्थल में बदल जाता है। यहां प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट खुले में पड़े रहते हैं। बदबू और गंदगी के कारण आसपास के रहवासी, राहगीर और कार्यालय आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर निगम अपने ही परिसर को स्वच्छ नहीं रख पा रहा है, तब पूरे शहर को स्वच्छ रखने के दावे खोखले प्रतीत होते हैं।

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रहवासियों के अनुसार शाम ढलते ही यह सुनसान सरकारी परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। खुलेआम शराबखोरी, हुड़दंग और आपत्तिजनक गतिविधियों के कारण क्षेत्र का माहौल बिगड़ रहा है। शांति नगर रोड से आने-जाने वाली महिलाओं, छात्राओं और बुजुर्गों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो पुलिस की नियमित गश्त बढ़ाई गई और न ही नगर निगम ने परिसर को सुरक्षित बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल की।

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