नाली निर्माण के लिए पांच लाख का इस्टीमेट, भूमि विवाद और सडक़ विभाग की आपत्ति से अटका काम, सरपंच ने किए प्रयास, वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर करवाई गई पानी की निकासी

कटनी/रीठी, यशभारत। जनपद पंचायत रीठी की ग्राम पंचायत करहिया के ग्राम मझगवां में वर्षा के दौरान एक मकान में जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति ने ग्राम पंचायत के सरपंच पर मनमानी का आरोप लगाते हुए वर्षा पूर्व जल निकासी के लिए नाली निर्माण नहीं कराने की बात कही हालांकि मौके पर ग्रामीणों से मिली जानकारी और सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। ग्रामीणों के अनुसार जल निकासी के लिए आवश्यक नाली निर्माण लगभग 5 लाख रुपये का प्राक्कलन संबंधित उपयंत्री द्वारा तैयार कर पंचायत को उपलब्ध करा दिया गया था लेकिन नाली जिस स्थान से प्रस्तावित थी, वहां निजी भूमि आने के कारण भूमि स्वामी ने अपनी बाउंड्री क्षतिग्रस्त नहीं होने देने की शर्त रख दी। दूसरी ओर जिस स्थान से नाली को लोक निर्माण विभाग की सडक़ पार करनी थी, वहां सडक़ निर्माण एजेंसी ने बिना विभागीय अनुमति सडक़ खोदे जाने पर कार्यवाही और क्षतिपूर्ति की चेतावनी दे दी। इस प्रकार पंचायत के सामने ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई, जहां एक ओर निजी भूमि का विवाद और दूसरी ओर विभागीय नियमों की बाध्यता खड़ी हो गई। परिणामस्वरूप नाली निर्माण का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच ने समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को कई बार वास्तविक स्थिति से अवगत कराया तथा आवश्यक अनुमति एवं समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। हाल ही में भारी वर्षा के दौरान तत्काल राहत देने के उद्देश्य से सरपंच द्वारा जेसीबी मशीन लगवाकर पानी की निकासी में बाधक बनी मिट्टी हटाने का कार्य भी कराया गया।
वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप चुनावी रंजिश से प्रेरित
ग्रामीणों के अनुसार जिस व्यक्ति ने वीडियो बनाकर आरोप लगाए। उसी ने प्रारंभ में मिट्टी हटाने का विरोध किया था लेकिन बाद में स्वयं सहमति देने पर सरपंच ने मिट्टी हटवाकर पानी निकासी का मार्ग बनवाया, जिससे अब स्थिति सामान्य हो चुकी है। गांव के अनेक जागरूक नागरिकों ने आरोप लगाया कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप चुनावी रंजिश से प्रेरित और तथ्यों से परे हैं। उनका कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि या संस्था पर सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले वस्तुस्थिति को समझना आवश्यक है, क्योंकि अपुष्ट आरोप न केवल समाज में भ्रम फैलाते हैं बल्कि प्रशासनिक कार्यों को भी प्रभावित करते हैं।
सरपंच एवं ग्रामीणों ने की अधिकारियों से मांग
सरपंच सहित ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराई जाए। यदि जांच में आरोप असत्य पाए जाते हैं तो झूठी सूचना फैलाकर प्रशासन को गुमराह करने, शासकीय समय की अनावश्यक बर्बादी करने तथा विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि भूमि विवाद और विभागीय समन्वय की समस्या का स्थायी समाधान निकालकर शीघ्र नाली निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को जलभराव जैसी परेशानी का सामना न करना पड़े। यह मामला केवल एक ग्राम पंचायत का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की उस चुनौती का प्रतीक है जहां विकास कार्य कई बार तकनीकी स्वीकृतियों, विभागीय समन्वय और निजी भूमि संबंधी विवादों में उलझ जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सभी संबंधित विभागों, जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच संवाद, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय ही स्थायी समाधान का आधार बन सकते हैं।






