
नई दिल्ली। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत को मामले का ट्रायल छह महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में सुनवाई पूरी नहीं होती है तो सोनम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।
यह आदेश मेघालय सरकार की उस याचिका पर आया, जिसमें मेघालय हाईकोर्ट द्वारा सोनम की जमानत बरकरार रखने के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटियों का हवाला देते हुए निचली अदालत के जमानत आदेश को सही माना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस राहत को समाप्त कर दिया।
सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के स्थान पर गलती से धारा 403 दर्ज हो गई थी, जो केवल टाइपिंग की त्रुटि थी। इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर हत्या जैसे गंभीर मामले में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि जमानत बरकरार रहने पर आरोपी के फरार होने की संभावना है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सोनम ने अपने प्रेमी और उसके साथियों के साथ मिलकर हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की सुनियोजित हत्या की। जांच के अनुसार पहले राजा की हत्या की गई और बाद में शव को खाई में फेंका गया। मामले में शामिल अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
वहीं, सोनम की ओर से अदालत में कहा गया कि वह निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। उसके वकील ने दलील दी कि अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। इसके साथ ही बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड के मुकदमे की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।







