मेरा यादगार केस: कातिल बाप ने जहाँ बीवी को दफनाया, ठीक 2 साल बाद उसी झाड़ी में बेटी का गला रेता…

मेरा यादगार केस: कातिल बाप ने जहाँ बीवी को दफनाया, ठीक 2 साल बाद उसी झाड़ी में बेटी का गला रेता…
भोपाल के जांबाज पुलिस अफसर ब्रजेंद्र मर्सकोले की जुबानी, उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक और यादगार ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री की इनसाइड स्टोरी!
अरविंद कुमार कपिल
भोपाल,यशभारत। अपराध की दुनिया में कई ऐसे मामले आते हैं जो पुलिस फाइलों में दर्ज होकर रह जाते हैं, लेकिन कुछ केस पुलिस अफसरों के जेहन पर हमेशा के लिए छप जाते हैं। 2007 बैच के सब-इंस्पेक्टर और भोपाल के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों में शुमार ब्रजेंद्र मर्सकोले के करियर का एक ऐसा ही केस है, जिसने हाफ मर्डर की तफ्तीश से शुरू होकर दो साल पुराने खौफनाक ब्लाइंड मर्डर का राजफाश कर दिया। आइए जानते हैं उस रात की पूरी दास्तान, खुद उस अफसर की जुबानी जिसने इस शैतान बाप को बेनकाब किया।
सवाल: सर, आपकी सर्विस में कई बड़े केस आए, लेकिन कोहेफिजा का यह केस आपकी जिंदगी का सबसे यादगार केस क्यों बन गया?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: देखिए, 2007 से पुलिसिंग में हूँ, कई गैंग पकड़े, मर्डर मिस्ट्री सुलझाईं। लेकिन यह केस सिर्फ एक क्राइम नहीं था, यह इंसानी क्रूरता की वो पराकाष्ठा थी जिसे देखकर एक पुलिस अफसर के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी मेरा कलेजा कांप गया था। एक बाप अपनी ही 8 साल की मासूम बेटी का गला रेत दे और उसकी मां को दो साल पहले मार चुका हो… ऐसा खौफनाक इत्तेफाक मैंने अपने पूरे करियर में नहीं देखा।
सवाल: शुरुआत कहाँ से हुई? उस रात 29 जनवरी 2024 कोहेफिजा थाने में क्या सूचना आई थी?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: रात के करीब साढ़े नौ बज रहे थे। कोहेफिजा इलाके की सुनसान झाड़ियों के पास से गुजर रहे कुछ राहगीरों ने फोन किया कि झाड़ियों से किसी बच्चे के रोने और तड़पने की आवाज आ रही है। हमारी टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जब टॉर्च की रोशनी झाड़ियों में डाली, तो वहां का मंजर देखकर हम सन्न रह गए। एक 7-8 साल की बच्ची लहूलुहान हालत में पड़ी थी। उसका गला किसी धारदार हथियार से इतनी बेरहमी से रेता गया था कि हड्डियां दिखने लगी थीं। चारों तरफ खून फैला था। डॉक्टर भी हैरान थे कि इतना खून बहने के बाद भी कुदरत के करिश्मे से उसकी सांसें चल रही थीं। हमने पहला काम किया उसे तुरंत अस्पताल में वेंटिलेटर पर शिफ्ट कराया।
सवाल: उस वक्त तो कातिल का कोई सुराग नहीं था, फिर शक की सुई पिता पर कैसे घूमी?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: दो दिन तक बच्ची जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही। जैसे ही उसे होश आया, मैं खुद उसका बयान लेने डॉक्टर की अनुमति से आईसीयू में गया। उसने जो टूटी-फूटी आवाज में बताया, उसने हमें हिलाकर रख दिया। बच्ची ने कहा पापा मुझे रात को आइसक्रीम खिलाने और घुमाने के बहाने लाए थे, और यहाँ लाकर अंधेरे में चाकू से मेरा गला काट दिया।
हमने तुरंत आरोपी पिता तेज सिंह की तलाश शुरू की। वह घर से गायब था। सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो वो बच्ची को ले जाता हुआ दिख गया। हमने घेराबंदी करके उसे दबोच लिया। उसने बेटी पर जानलेवा हमले की बात तो कबूल कर ली, लेकिन कहानी में असली मोड़ अभी आना बाकी था।
सवाल: असली मोड़ क्या था? एक हाफ मर्डर का केस ब्लाइंड मर्डर में कैसे तब्दील हुआ?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: यही पुलिसिंग का सबसे दिलचस्प और थ्रिलिंग हिस्सा है। जब हम आरोपी तेज सिंह को लेकर दोबारा उस झाड़ी क्राइम सीन पर तफ्तीश और साक्ष्य जुटाने गए, तो वहां के पुराने बाशिंदों और हमारी टीम के पुराने रिकॉर्ड से एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई। ठीक दो साल पहले, यानी 29 जनवरी 2022 को, उसी तारीख को उसी झाड़ी में एक महिला की सड़ी-गली लाश मिली थी, जिसका चेहरा पत्थर से कुचला हुआ था। उस वक्त महिला की पहचान नहीं हो पाई थी और वह केस हमारी फाइलों में ब्लाइंड मर्डर बनकर बंद होने की कगार पर था।
सवाल: तो क्या आपको तुरंत शक हो गया कि ये दोनों केस आपस में जुड़े हैं?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: बिल्कुल! कड़ियाँ अपने आप जुड़ रही थीं। पहला इत्तेफाक दोनों वारदातों की जगह एक ही झाड़ी थी। दूसरा इत्तेफाक तारीख भी बिल्कुल एक थी 29 जनवरी। तीसरा और सबसे बड़ा सुराग बच्ची ने बयान में बताया था कि उसका पिता उसकी मां से बेहद नफरत करता था और गला काटते वक्त भी उसकी मां को गालियां दे रहा था। और जब हमने रिकॉर्ड देखा कि बच्ची की मां भी ठीक दो साल पहले से गायब थी, तो मेरा माथा ठनका। मैंने अपनी टीम से कहा यह कोई आम केस नहीं है, इस बाप के भीतर कोई गहरा और खौफनाक राज दफन है।
सवाल: तेज सिंह तो शातिर अपराधी की तरह बर्ताव कर रहा था, आपने उससे सच कैसे उगलवाया?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: देखिए, जब ऐसे अपराधी को लगता है कि वो एक बार बच निकला है, तो उसका कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर होता है। उसने शुरू में हमें बहुत गुमराह किया। कभी कहता बीवी भाग गई, कभी कहता उसे पता ही नहीं। लेकिन जब मैंने उसके सामने 29 जनवरी 2022 की उस अज्ञात महिला की लाश की तस्वीरें रखीं और कड़ाई से मनोवैज्ञानिक पूछताछ की, तो वह अपनी ही बातों के जाल में फंस गया।
आखिरकार वह घुटनों पर आ गया और रोने लगा। उसने कबूल किया कि दो साल पहले चरित्र शंका के चलते उसने अपनी पत्नी की हत्या कर उसी झाड़ी में फेंका था। चूंकि उस वक्त पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाई, तो उसका हौसला बढ़ गया।
सवाल: लेकिन अपनी ही मासूम बेटी को उसी खौफनाक अंदाज में मारने की वजह क्या थी?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: उसने जो वजह बताई, वो किसी भी सामान्य इंसान की सोच से परे है। तेज सिंह अपनी पत्नी से इतनी नफरत करता था कि जब भी वो अपनी बेटी को देखता, उसे अपनी पत्नी का चेहरा याद आता था। वो अपनी नफरत में अंधा हो चुका था। उसने जानबूझकर वही तारीख 29 जनवरी और वही जगह चुनी ताकि वो अपनी बेटी को भी हमेशा के लिए खामोश कर सके। उसने सोचा था कि पिछली बार की तरह इस बार भी लाश सड़ जाएगी और पुलिस को कुछ पता नहीं चलेगा। लेकिन वो भूल गया था कि कुदरत का इंसाफ अभी बाकी था। बेटी जिंदा बच गई और उसने अपनी मां की मौत का हिसाब भी अपने जल्लाद बाप से चुकता करवा दिया।
सवाल: एक आखरी सवाल सर, जब यह केस पूरी तरह सुलझ गया, तो एक इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के तौर पर आपको कैसा महसूस हुआ?
ब्रजेंद्र मर्सकोले: एक अजीब सा सुकून था। कानूनन तो हमने एक आरोपी को जेल भेजा, लेकिन रूहानी तौर पर ऐसा लगा कि उस तड़पती हुई बच्ची ने अपनी मां की आत्मा को न्याय दिलाया है। अगर उस रात कोहेफिजा पुलिस मुस्तैदी से काम न करती या हम उस झाड़ी के पुराने इतिहास को न खंगालते, तो एक बेगुनाह महिला का कत्ल हमेशा के लिए दफन रह जाता और वो कातिल बाप समाज में छुट्टा घूम रहा होता। मेरे पूरे करियर में, यह केस हमेशा मेरी तफ्तीश, सब्र और पुलिसिंग के जज्बे का सबसे यादगार हिस्सा रहेगा।







