कटनी

14 दिन की फॉरेस्ट रिमांड पर लिए गए शिकारी, पूछताछ के बाद बड़े नेटवर्क का होगा खुलासा, तालाब के पानी को कराया खाली, कराई जा रही जांच, विजयराघवढ़ वन परिक्षेत्र के घुघरी बीट में जहरीला पानी पीने से 15 वन्य जीवों की मौत का मामला

कटनी, यशभारत। विजयराघवढ़ वन परिक्षेत्र के ग्राम घुघरी में तालाब में जहर मिलाकर वन्य प्राणियों की मौत की घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों से वन विभाग के अधिकारी सघन पूछताछ कर रहे हैं। पूछताछ के बाद एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा कई ऐसे सवाल है, जिसका पता लगाने का प्रयास वन विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इतनी बड़ी घटना केवल कुछ लोगों द्वारा अंजाम नहीं दी जा सकती। ऐसे में अब रिमांड के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। जहर कहां से लाया गया। शिकार के बाद मांस कहां जाता था और क्या इस गिरोह ने पहले भी इसी तरह कई वारदातों को अंजाम दिया है। वन अधिकारियों की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि जंगल के तालाब में जहरीला पदार्थ मिलाने का मकसद वन्यजीवों का शिकार करना था। रात के समय जैसे ही चीतल और सांभर तालाब का पानी पीते थे, कुछ ही देर में उनकी मौत हो जाती थी और इसके बाद आरोपी मृत वन्य जीवों का मांस निकालकर घर ले जाते थे और उबालकर खाते थे। आरोपी पहले भी कई बार इसी तरीके से वन्यजीवों का शिकार कर चुके थे। हर बार घटना सामने आने से पहले ही बच निकलते थे।
12 चीतल और 2 सांभर के शव मिलने से हडक़म्प
वन्य जीवों की सामूहिक मौत की यह घटना विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र के अंतर्गत घुघरी बीट के आरएफ 62 से लगे जंगल की है। गुरुवार सुबह नियमित गश्त के दौरान वन विभाग की टीम को तालाब के आसपास करीब 100 मीटर के दायरे में 12 चीतल और 2 सांभर मृत मिले। एक साथ इतने वन्यजीवों की मौत की सूचना मिलते ही विभाग ने पूरे इलाके को घेर लिया और डॉग स्कवाड की मदद से सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जांच के दौरान डॉग स्कवाड घुघरी गांव में एक संदिग्ध के घर तक पहुंचा। तलाशी में ताजा खून के निशानए वन्यजीवों के बालए मांस, शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे और अन्य उपकरण बरामद किए गए। इसके बाद वन विभाग ने सुरेश चौधरी को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर दुर्गेश समेत कुल तीन आरोपियों को घुघरी और गाडरी गांव से गिरफ्तार किया गया।
आरोपियों ने ही तालाब के पानी में मिलाया जहर : एसडीओ
वन विभाग के एसडीओ सुरेश बारोले के मुताबिक प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने तालाब के पानी में जहर मिलाने की बात स्वीकार की है। आशंका है कि जहरीला पानी पीने से ही चीतल और सांभर की मौत हुई। सभी मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कराया गया है, जबकि तालाब के पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक कारणों की पुष्टि होगी। तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन अमले ने डॉग स्कवाड के साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खोजी कुत्ता सूंघते हुए सीधे घुघरी गांव के एक संदिग्ध घर तक जा पहुंचा। तलाशी के दौरान वहां से वन्यजीवों का मांस, ताजा खून, बाल और शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे व धारदार हथियार बरामद हुए।
वन्यजीवों का शिकार पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा
वन विभाग का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों का एक साथ शिकार पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। इसलिए अधिकारियों का फोकस अब केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं है। पूछताछ में मिले के सुरागों के आधार पर आसपास गांवों में भी जानकारी जुटाई जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी किसी संगठित शिकारी गिरोह से जुड़े हैं। क्या उनके साथ अन्य लोग भी मौके पर मौजूद थे और क्या जंगल के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह का शिकार किया जाता रहा है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से कराया पोस्टमार्टम
घटना के बाद वन विभाग ने मृत सभी वन्यजीवों का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से कराया। शुक्रवार को एक और वन्यजीव की मौत की पुष्टि होने के बाद मृतकों की संख्या बढक़र 15 हो गई है। इनमें बड़ी संख्या में चीतल और दो सांभर शामिल हैं। वन अधिकारियों के अनुसार जंगल में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि कहीं और कोई प्रभावित वन्यजीव तो नहीं है।
पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार
वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए मुख्य संदिग्ध सुरेश चौधरी को हिरासत में लिया। सभी मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार कर दिया गया है। फिलहाल तीनों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
तालाब के पानी के नमूने की हो रही जांच
वन्यजीवों की मौत की घटना के बाद अब जांच भी शुरू हो गई है। जानकारी के मुताबिक इस घटना में वन्यजीवों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण कराया जा रहा है। तालाब के पानी के नमूने, वन्यजीवों के विसरा और अन्य जैविक नमूने जांच के लिए जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह पता चल सकेगा कि पानी में कौन सा जहरीला पदार्थ मिलाया गया था और उसकी मात्रा कितनी थी। यही रिपोर्ट आगे न्यायालय में भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बनेगी।
तालाब का पानी कराया खाली : डीएफओ
वन मंडल अधिकारी गर्वित गंगवार ने बताया कि इस घटना की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है। आरोपियों को न्यायालय से 14 दिन की रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान आरोपियों से इस घटना को लेकर बारीकी से पूछताछ की जा रही है। पानी के सैंपल जांच के लिए जबलपुर लैब भेजे गए हैं। प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। एहतियात के तौर पर तालाब का पूरा पानी खाली करा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पानी में जहर बचा रहता तो अन्य घटना के बाद वन विभाग ने वन्य जीव भी उसकी चपेट में आ सकते थे। आसपास के जल स्रोतों की भी निगरानी की जा रही है और वन अमले को लगातार गश्त के निर्देश दिए गए हैं।

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