भोपाल से रीवा तक फैला फर्जी नियुक्ति पत्रों का जाल: ठगी की मास्टरमाइंड गिरफ्तार

भोपाल से रीवा तक फैला फर्जी नियुक्ति पत्रों का जाल: ठगी की मास्टरमाइंड गिरफ्तार
बेरोजगार युवाओं को बनाती थी निशाना; बैंक क्लर्क, रेलवे एलडीसी से लेकर नकली आईएफएस अधिकारी तक के थमाए जॉइनिंग लेटर
भोपाल, यशभारत। राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में सरकारी नौकरी और अटल आवास योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक हाईप्रोफाइल ठग गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने गिरोह की मुख्य सरगना प्रमिला तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, उसने पुलिस प्रशासन को भी चौंका दिया है। यह शातिर महिला सरकारी विभागों के फर्जी लेटरहेड और सील का उपयोग कर बेरोजगारों को बैंक क्लर्क, रेलवे कर्मचारी और यहाँ तक कि क्लास-1 राजपत्रित अधिकारी बनाने का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठती थी।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल
मामले का खुलासा तब हुआ जब भोपाल के कोटरा सुल्तानाबाद निवासी प्रतीक सोनी ने टीटी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। प्रतीक को अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर प्रमिला ने 1.80 लाख रुपये ऐंठे थे। जब प्रतीक को फर्जी रसीद और अलॉटमेंट लेटर थमाया गया, तो उसे ठगी का अहसास हुआ। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रमिला तिवारी को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद जांच की कड़ियाँ जुड़ती चली गईं। अब तक भोपाल, रीवा, जबलपुर, बैतूल और सतना के 7 बड़े मामले सामने आ चुके हैं।
डेटा जुटाकर सीधे करती थी कॉल, सरकारी दफ्तरों में रचा जाता था ड्रामा
इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। प्रमिला के पास बेरोजगार युवाओं का शैक्षणिक डेटा और मोबाइल नंबर पहले से मौजूद होते थे। जब वह पूरी जानकारी के साथ सीधे युवाओं को कॉल करती, तो पीड़ितों को लगता था कि किसी सरकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी का फोन है। भरोसा जीतने के लिए गिरोह के सदस्य पीड़ितों को सरकारी कार्यालयों के बाहर बुलाते थे, जहाँ पहले से उनके कुछ साथी मौजूद रहते थे जो खुद को प्रमिला की मदद से नौकरी पा चुका कर्मचारी बताते थे। हद तो तब हो गई जब प्रमिला खुद वन विभाग के एक महिला अधिकारी के केबिन तक जाकर पीड़ितों को फाइल आगे बढ़ने का नाटक दिखाती थी।
डेढ़ महीने तक कराया फर्जी फील्ड सर्वे
ठगी का एक हैरान करने वाला मामला भोपाल के करोंद निवासी राहुल विश्वकर्मा और नवीन सौंधिया का है। राहुल से 2.50 लाख रुपये और नवीन से 55 हजार रुपये लेकर उन्हें नगर निगम में सर्वेयर की नौकरी का झांसा दिया गया। गिरोह के एक सदस्य ने खुद को निगम अधिकारी बताकर राहुल से करीब डेढ़ महीने तक फील्ड सर्वे भी कराया। बाद में दोनों को नगर निगम के बजाय वन विभाग का फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया गया।
इन युवाओं को बनाया अपनी ठगी का शिकार
भोपाल के नवीन सौंधिया को वन विभाग का फर्जी नियुक्ति पत्र देकर उन्हें सीधे 1997 बैच का आईएफएस अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक पद पर पोस्टिंग दर्शा दी गई। वहीं राजीव विश्वकर्मा को एसबीआई की न्यू मार्केट ब्रांच में क्लर्क की नौकरी का झांसा देकर एसबीआई मुंबई के नाम का फर्जी पत्र थमाया गया।
रीवा के राकेश दुबे की बेटी से सरकारी नौकरी के नाम पर 5 लाख रुपये ऐंठे गए और लोक निर्माण विभाग मंत्री के जाली हस्ताक्षर वाला नियुक्ति पत्र दे दिया गया। बाद में उन्हें रेलवे के रतलाम मंडल में नौकरी दिलाने का नया झांसा दिया जा रहा था। इसके अलावा जबलपुर के हिमांशु व प्रियांशु को वन विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी जॉइनिंग लेटर सौंपे गए।
बैतूल की राधा को नॉर्दर्न रेलवे में एलडीसी पद पर नियुक्ति का पत्र दिया गया, जिस पर भविष्य की तारीख यानी 7 सितंबर 2025 दर्ज थी। ठीक इसी तरह सतना के रविशंकर शर्मा को केंद्रीय वित्त मंत्रालय में क्लर्क ट्रेनिंग का फर्जी पत्र थमाया गया, जिस पर जारी होने की तिथि 26 अगस्त 2025 दर्शाई गई थी।
इनका कहना है…
सरकारी नौकरी और आवास दिलाने के नाम पर ठगी की कई शिकायतें और दस्तावेज मिले हैं। मुख्य आरोपी महिला प्रमिला तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं।
गौरव सिंह, थाना प्रभारी , टीटी नगर, भोपाल







