सुप्रीम कोर्ट से भी मीनाक्षी को झटका: चुनावी प्रक्रिया में अदालत का दखल से इनकार

सुप्रीम कोर्ट से भी मीनाक्षी को झटका: चुनावी प्रक्रिया में अदालत का दखल से इनकार
वोट चोरी के बाद अब सीट चोरी हुई, फॉर्म-26 को लेकर कांग्रेस का दिल्ली में बवाल; मार्च कर रहे विधायक हिरासत में
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर मप्र से शुरू हुई सियासी जंग अब देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों तक पहुँच गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 329(B) के तहत चुनावी प्रक्रिया के दौरान अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। उम्मीदवार के पास चुनाव संपन्न होने के बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का विकल्प खुला है।
सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने शुरुआती चरण में ही उनकी मुवक्किल को रेस से बाहर कर दिया। उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि हार-जीत का फैसला जनता और लोकतंत्र की प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय नियमानुसार हाई कोर्ट का रुख करना होगा।
फॉर्म नंबर 26 बना विवाद की जड़: नटराजन
अदालत के फैसले के बाद दिल्ली में कांग्रेस दफ्तर (24 अकबर रोड) में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मीनाक्षी नटराजन ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, पहले हमारे वोट चोरी किए गए और अब सीट चोरी कर ली गई। चुनाव आयोग इस कदर मिला हुआ है कि हमारे द्वारा दिए गए नोटिस का 48 घंटे बाद भी कोई जवाब नहीं दिया। नटराजन ने दावा किया कि नामांकन रद्द करने की मुख्य वजह फॉर्म नंबर 26 को बनाया गया, जबकि उसमें सिर्फ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है। उन्हें सिर्फ एक लीगल नोटिस मिला था, जिसे फॉर्म में दर्शाने का कोई कॉलम ही नहीं था।
दिल्ली में मप्र कांग्रेस का प्रदर्शन, मुर्मू से समय न मिलने पर हंगामा
नामांकन निरस्तीकरण के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस के 61 विधायक दिल्ली पहुंचे थे। विधायकों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन समय नहीं मिला। इसके विरोध में जब पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विधायकों ने राष्ट्रपति भवन की ओर पैदल मार्च शुरू किया, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने सभी विधायकों को हिरासत में लिया और बसों में भरकर धरना स्थल से दूर ले जाकर छोड़ा।
राष्ट्रपति सिर्फ भाजपा की हैं, 6 महीने से चल रहा सीट चोरी का खेल
गिरफ्तारी के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखा बयान देते हुए कहा कि द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति नहीं, बल्कि सिर्फ बीजेपी की राष्ट्रपति बनकर रह गई हैं। वहीं, मप्र कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी पिछले 6 महीने से यह क्राइम कर रही है। पहले उपचुनावों में आदिवासी विधायक मुकेश मल्होत्रा को हटाया गया, फिर राजेंद्र भारती की विधायकी छीनी गई और अब राज्यसभा की सीट ही चोरी कर ली गई।






