भोपालमध्य प्रदेश

इंदौर कलेक्टोरेट पर किसानों का अनिश्चितकालीन डेरा: जमीन अधिग्रहण के खिलाफ राशन-पानी लेकर जुटे हजारों किसान

इंदौर कलेक्टोरेट पर किसानों का अनिश्चितकालीन डेरा: जमीन अधिग्रहण के खिलाफ राशन-पानी लेकर जुटे हजारों किसान

इंदौर, यशभारत। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्वी बायपास प्रोजेक्ट और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए किए जा रहे जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। सोमवार को सिमरोल, तिल्लौर खुर्द, फरसपुर, खुड़ैल और खंडवा रोड सहित आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों किसान इंदौर कलेक्टोरेट के बाहर गंजी कंपाउंड में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान अपने साथ आटा, दाल और राशन-पानी लेकर आए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक दोनों प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, वे कलेक्टोरेट से टस से मस नहीं होंगे।

तपती सड़क पर दिव्यांग ने लगाई लोट, दो किसानों की बिगड़ी तबीयत
प्रदर्शन के दौरान उस वक्त स्थिति बेहद भावुक और तनावपूर्ण हो गई, जब एक दिव्यांग किसान ने अर्द्धनग्न होकर भीषण गर्मी में तपती हुई सड़क पर लोट लगानी शुरू कर दी। दोपहर की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के कारण प्रदर्शन में शामिल दो किसानों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हजारीलाल नामक एक बुजुर्ग किसान को चक्कर आने के बाद तुरंत अस्पताल भेजा गया। इस आंदोलन में पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो सड़कों पर ही डटे हुए हैं।

अधिकारियों की समझाइश बेअसर, स्थायी समाधान पर अड़े किसान
सुबह से शुरू हुए इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, अधिकारियों की समझाइश का किसानों पर कोई असर नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि वे इससे पहले भी कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन हर बार प्रदर्शन खत्म होते ही प्रशासन अपनी बातें भूल जाता है। किसानों ने दोटूक कहा कि इस बार वे किसी खोखले आश्वासन पर नहीं, बल्कि स्थायी समाधान होने के बाद ही अपना धरना खत्म करेंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो वे कलेक्टोरेट के बाहर ही भोजन बनाएंगे और वहीं रहेंगे।

हाई कोर्ट लगा चुका है यथास्थिति का आदेश
गौरतलब है कि इस पूरे मामले में भारतीय किसान यूनियन की ओर से हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। पिछले महीने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय हाई कोर्ट ने इस योजना को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया था। साथ ही कोर्ट ने एनएचएआई और जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था। इसके बावजूद जमीन खोने के डर से किसानों का आक्रोश कम नहीं हो रहा है और उन्होंने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

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